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प्रश्न
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उत्तर
एक बेटी शिक्षित होती है तो वह शिक्षा का उपयोग अपने पूरे परिवार को साक्षर बनाने व उसके हित के लिए करती है। शिक्षा के कारण ही वह स्वयं के अधिकारों को सुरक्षित करती है और स्वयं को सक्षम बनाती है। आज की शिक्षित बेटी ही कल की कुशल गृहिणी (स्त्री) है। स्त्री शिक्षित होगी तो वह अपने घर की समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकती है। इससे परिवार आसानी से चलता रहेगा। स्त्रियों की भागीदारी से देश का आर्थिक विकास और सकल घरेलू उत्पादन बढ़ जाता है। स्त्री की शिक्षा गरीबी पर नियंत्रण करने का एक प्रभावी उपाय है। इसके साथ ही घरेलू हिंसा व सामाजिक अत्याचार का शिकार होने वाली स्त्री यदि शिक्षित होगी, तो वह इस तरह की घटनाओं पर अपनी सक्षमता से नियंत्रण पा सकेगी। संतान की पहली गुरु उसकी माँ होती है। अत: स्त्री की शिक्षा का असर स्वयं के साथ-साथ परिवार, समाज व देश की पीढ़ी पर पड़ेगा। अहिल्याबाई होलकर, सावित्रीबाई फुले, कल्पना चावला जैसी स्त्रियों का योगदान ही स्त्री शिक्षा के प्रभाव का सर्वोत्तम उदाहरण है। इनके कार्यों के पीछे इनकी शिक्षा का महत्त्व था। संक्षेप में कह सकते हैं कि यदि स्त्री शिक्षित होगी तो वह अपने साथ ही परिवार, समाज व देश के विकास में संपूर्ण व महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
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| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
आप आस्था/मनु हैं। 'ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य' इस विषय पर लगभग 100 शब्दों में अपने विचार लिखकर किसी दैनिक समाचार- पत्र के संपादक को भेजिए।
