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प्रश्न
यदि मैं पुस्तक होता/होती तो ......
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उत्तर
यदि मैं पुस्तक होता तो मुझे बहुत आनंद आता। मैं रंग-बिरंगे ढेर सारे सुंदर चित्रों वाली पुस्तक होता। जिसे पढ़कर सारे बच्चों के चेहरे पर मुसकान आती और मुसकान को देखकर मैं भी मुसकुरा उठता। मैं पुस्तक बनकर सब जगह ज्ञान की रोशनी फैलाता। मेरा मकसद सभी का ज्ञानवर्धन करना होता। मेरे भीतर सिर्फ मनोरंजन ही नहीं अपितु विज्ञान, साहित्य आदि से जुड़ी भी ढेरों जानकारियाँ होतीं। मैं लाइब्रेरी में पड़े रहने से ज्यादा पाठकों के हाथों में रहना पसंद करता। मैं यह चाहता कि मेरी कीमत अधिक न हो। इससे गरीब-से-गरीब पाठक भी मेरा लाभ उठा सकता। मैं अपने से जुड़े लोगों को कभी निराश नहीं करता। मैं अपने पाठक को कभी ऊबन नहीं होने देता। मैं उनकी रुचि और आवश्यकता के अनुसार उनसे बातें करता। मैं उनकी सफलता का भी खयाल रखता। मैं उन्हें जीवनोपयोगी शिक्षा देता, जिससे वे एक सफल, सजग व बेहतर इंसान बनते।
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