मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ६ वी

यदि मैं पुस्तक होता/होती तो ......

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प्रश्न

यदि मैं पुस्तक होता/होती तो ......

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

यदि मैं पुस्तक होता तो मुझे बहुत आनंद आता। मैं रंग-बिरंगे ढेर सारे सुंदर चित्रों वाली पुस्तक होता। जिसे पढ़कर सारे बच्चों के चेहरे पर मुसकान आती और मुसकान को देखकर मैं भी मुसकुरा उठता। मैं पुस्तक बनकर सब जगह ज्ञान की रोशनी फैलाता। मेरा मकसद सभी का ज्ञानवर्धन करना होता। मेरे भीतर सिर्फ मनोरंजन ही नहीं अपितु विज्ञान, साहित्य आदि से जुड़ी भी ढेरों जानकारियाँ होतीं। मैं लाइब्रेरी में पड़े रहने से ज्यादा पाठकों के हाथों में रहना पसंद करता। मैं यह चाहता कि मेरी कीमत अधिक न हो। इससे गरीब-से-गरीब पाठक भी मेरा लाभ उठा सकता। मैं अपने से जुड़े लोगों को कभी निराश नहीं करता। मैं अपने पाठक को कभी ऊबन नहीं होने देता। मैं उनकी रुचि और आवश्यकता के अनुसार उनसे बातें करता। मैं उनकी सफलता का भी खयाल रखता। मैं उन्हें जीवनोपयोगी शिक्षा देता, जिससे वे एक सफल, सजग व बेहतर इंसान बनते।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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पाठ 1.07: मेरा अहोभाग्य - मेरा अहोभाग्य [पृष्ठ १६]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 6 Maharashtra State Board
पाठ 1.07 मेरा अहोभाग्य
मेरा अहोभाग्य | Q (२) | पृष्ठ १६

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मी भा हो भा     - ______
नी से भि   - ______
मं बं जू   - ______
स्क रा र्य भा चा   - ______
जे. ला ए.  पी. - ______
जा म्म की - ______
ना ला चा ल्प - ______

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:

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