हिंदी

यदि मैं पुस्तक होता/होती तो ...... - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

यदि मैं पुस्तक होता/होती तो ......

संक्षेप में उत्तर
Advertisements

उत्तर

यदि मैं पुस्तक होता तो मुझे बहुत आनंद आता। मैं रंग-बिरंगे ढेर सारे सुंदर चित्रों वाली पुस्तक होता। जिसे पढ़कर सारे बच्चों के चेहरे पर मुसकान आती और मुसकान को देखकर मैं भी मुसकुरा उठता। मैं पुस्तक बनकर सब जगह ज्ञान की रोशनी फैलाता। मेरा मकसद सभी का ज्ञानवर्धन करना होता। मेरे भीतर सिर्फ मनोरंजन ही नहीं अपितु विज्ञान, साहित्य आदि से जुड़ी भी ढेरों जानकारियाँ होतीं। मैं लाइब्रेरी में पड़े रहने से ज्यादा पाठकों के हाथों में रहना पसंद करता। मैं यह चाहता कि मेरी कीमत अधिक न हो। इससे गरीब-से-गरीब पाठक भी मेरा लाभ उठा सकता। मैं अपने से जुड़े लोगों को कभी निराश नहीं करता। मैं अपने पाठक को कभी ऊबन नहीं होने देता। मैं उनकी रुचि और आवश्यकता के अनुसार उनसे बातें करता। मैं उनकी सफलता का भी खयाल रखता। मैं उन्हें जीवनोपयोगी शिक्षा देता, जिससे वे एक सफल, सजग व बेहतर इंसान बनते।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.07: मेरा अहोभाग्य - मेरा अहोभाग्य [पृष्ठ १६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
अध्याय 1.07 मेरा अहोभाग्य
मेरा अहोभाग्य | Q (२) | पृष्ठ १६

संबंधित प्रश्न

मैंने समझा वारिस कौन? पाठ से 


पानी, वाणी, दूध इन शब्‍दों का उपयोग करते हुए कोई कविता लिखो।


स्‍वामी विवेकानंद का कोई भाषण पढ़ो और प्रमुख वाक्‍य बताओ।


यदि तुम सैनिक होते तो .....


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


विलुप्त होते हुए प्राणियों तथा पक्षियों की जानकारी प्राप्त करके सूची बनाओ।


एक महीने की दिनदर्शिका बनाओ और विशेष दिन बताओ।


आपने समाचारपत्रों, टी.वी. आदि पर अनेक प्रकार के विज्ञापन देखे होंगे जिनमें ग्राहकों को हर तरीके से लुभाने का प्रयास किया जाता है, नीचे लिखे बिंदुओं के संदर्भ में किसी एक विज्ञापन की समीक्षा कीजिए और यह लिखिए कि आपको विज्ञापन की किस बात से सामान खरीदने के लिए प्रेरित किया।

  1. विज्ञापन में सम्मिलित चित्र और विषय-वस्तु
  2. विज्ञापन में आए पात्र व उनका औचित्य
  3. विज्ञापन की भाषा

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

'भक्तिन' एक कर्मठ नारी के संघर्षमय जीवन की कहानी है। इस कथन को भक्तिन के जीवन के चार अध्यायों के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×