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तुम अपनी छोटी बहन/छोटे भाई के लिए क्या करते हो? - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

तुम अपनी छोटी बहन/छोटे भाई के लिए क्या करते हो?

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उत्तर

मेरा छोटा भाई तीसरी कक्षा में पढ़ता है। मैं हमेशा उसका ध्यान रखता हूँ। मैं पढ़ाई में उसकी मदद करता हूँ। हम जब खेलने जाते हैं, तो मैं उसे क्रिकेट और फुटबॉल खेलना सिखाता हूँ। मैं उसे कंप्यूटर चलाना सिखाता हूँ। हम दोनों साथ-साथ म्यूजिक क्लास और कराटे क्लास जाते हैं। मैं हर तरह से उसका ध्यान रखता हूँ।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.09: जन्मदिन - जन्मदिन [पृष्ठ २२]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
अध्याय 1.09 जन्मदिन
जन्मदिन | Q (७) | पृष्ठ २२

संबंधित प्रश्न


मैंने समझा दाे लघुकथाएँ पाठ से 


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


यदि तुम्हें परी मिल जाए तो .....


प्राणियों का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है।


देशभक्ति पर आधारित कविता सुनो और सुनाओ।


मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो:


शाक (पत्तोंवाली) और सब्जियों के पाँच-पाँच नाम सुनो और सुनाओ।


दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-

उच्च शिक्षा हेतु छात्रों का विदेशों को पलायन


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए 'असंभव', 'गंदा' या 'नीचा' शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।'' ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।'' मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है ? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और 'निर्मल हृदय' जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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