मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ७ वी

।। हम विज्ञान लोक के वासी ।।

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प्रश्न

।। हम विज्ञान लोक के वासी ।।

लघु उत्तर
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उत्तर

विज्ञान के चमत्कारों के कारण आज मानव का जीवन अधिक सरल, सुखमय व आरामदायक बन गया है। सुबह उठने के लिए अलार्म घड़ी से लेकर रात को नरम-नरम बिस्तर पर सोने तक हम जाने-अनजाने विज्ञान के चमत्कारों पर आश्रित हैं। हवाई जहाज, रेलगाड़ी, कार, मोबाइल, संगणक, मिसाइल, रोबोट जैसे अनेक आधुनिक यंत्रों व उपकरणों के आविष्कारों से मानव ने विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विज्ञान के इस आश्चर्यजनक लोक में हम सभी भौतिक सुखों का आनंद प्राप्त कर रहे हैं।

हम विज्ञान लोक के वासी
हमें मिटानी है धरती से
भूख, प्यास, दुख, दर्द, उदासी
हम विज्ञान लोक के वासी।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.06: ‘पृथ्‍वी’ से ‘अग्‍नि’ तक - विचार मंथन [पृष्ठ १६]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
पाठ 1.06 ‘पृथ्‍वी’ से ‘अग्‍नि’ तक
विचार मंथन | Q (१) | पृष्ठ १६
बालभारती Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
पाठ 6 'पृथ्वी' से 'अग्नि' तक
पाठ्य प्रश्न | Q १. | पृष्ठ ५१

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प्रति,

______
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विषय : ______
संदर्भ : ______
महोदय,
विषय विवेचन

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भवदीय/भवदीया,

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ई-मेल आईडी : ____________


यदि प्राकृतिक संसाधन समाप्त हो जाएँ तो...... जैसे - जल, वन आदि।



पूरी वर्णमाला क्रम से पढ़ो:

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पुण्यश्लोक अहिल्‍याबाई होळकर के कार्य पढ़ो और प्रमुख मुद्दे बताओ।


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“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:

नीचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।

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