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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर लगभग 70 से 80 शब्दों में निबंध लिखिए:
मैं पृथ्वी बोल रही हूँ...
निम्नलिखित विषय पर लगभग 60 से 70 शब्दों में निबंध लिखिए:
मैं पृथ्वी बोल रही हूँ...
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उत्तर
मैं पृथ्वी बोल रही हूँ...
नमस्ते! मैं पृथ्वी हूँ। मैं वही नीली वसुंधरा हूँ, जिसने तुम्हें जीवन दिया, पोषण दिया और अपनी गोद में सिर छिपाने की जगह दी। करोड़ों वर्षों से मैंने सूर्य की तपिश खुद झेली और तुम्हें शीतल छाया प्रदान की। मैंने तुम्हें ऊँचे पर्वत, अथाह सागर, कल-कल करती नदियाँ और लहलहाते वन उपहार स्वरूप दिए। लेकिन आज, मैं अत्यंत व्यथित और व्याकुल हूँ। आज मैं अपनी पीड़ा को शब्दों में पिरोकर तुम्हारे सामने रख रही हूँ।
शुरुआत में हमारा रिश्ता बहुत सुंदर था। मनुष्य प्रकृति की पूजा करता था और हम एक-दूसरे के पूरक थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला, तुम्हारी जरूरतें ‘लालच’ में बदल गईं। तुमने अपनी सुख-सुविधाओं के लिए मेरे सीने को छलनी करना शुरू कर दिया। जिसे तुम ‘विकास’ कहते हो, वह वास्तव में मेरी बर्बादी की कहानी है। तुमने अपनी ऊँची इमारतों के लिए मेरे घने वनों को काट दिया, जो मेरी सांसें थे। परिणामस्वरूप, आज मेरी गोद में रहने वाले अनगिनत मूक पशु-पक्षी बेघर हो गए और कई प्रजातियां तो लुप्त ही हो गईं।
जरा देखो मेरी हवा को, जिसे मैंने तुम्हें शुद्ध और प्राणदायी बनाया था। आज वह जहरीली हो चुकी है। कारखानों की चिमनियों और सड़कों पर दौड़ते वाहनों के धुएँ ने आसमान को धुंधला कर दिया है। मेरी नदियाँ, जिन्हें तुम ‘माँ’ कहकर पूजते हो, आज कूड़ेदान बनकर रह गई हैं। उनमें प्रवाहित होता जहरीला रसायन न केवल जल को दूषित कर रहा है, बल्कि मेरे भीतर के जीवन को भी नष्ट कर रहा है।
सबसे भयानक संकट ‘ग्लोबल वार्मिंग’ का है। मेरा तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघल रही है और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। अनियंत्रित मौसम, विनाशकारी बाढ़ और भयानक सूखे मेरी इसी पीड़ा की चीखें हैं। मनुष्य भूल गया है कि वह प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसका एक छोटा सा हिस्सा है। यदि मेरा अस्तित्व खतरे में है, तो तुम्हारा भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह सकता।
मेरे प्यारे बच्चों, अभी भी समय है। मैं मरना नहीं चाहती, मैं फिर से खिलखिलाना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि मेरे पर्वत फिर से बर्फ से ढके रहें और मेरी नदियाँ फिर से निर्मल बहें। इसके लिए तुम्हें अपनी जीवनशैली बदलनी होगी। अधिक से अधिक पेड़ लगाओ, प्लास्टिक का त्याग करो और ऊर्जा के प्राकृतिक स्रोतों का उपयोग करो। प्रदूषण कम करो और जल की हर बूंद को बचाओ।
Notes
Students should refer to the answer according to their questions.
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