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प्रश्न
‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’ इस कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए ।
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उत्तर
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल' अर्थात मातृभाषा ही सभी प्रकार की उन्नति का मुख्य आधार है। निज भाषा की उन्नति के बिना संपूर्ण विकास संभव नहीं है। बच्चे के जन्म के बाद उसका घर ही उसकी पहली पाठशाला होती है। भारतेंदु जी का यह कथन एकदम सही है कि अपनी भाषाकी उन्नति के बिना हर प्रकार की उन्नति महत्त्वहीन है। जहाँ अपने परिवार, समाज व देश के विकास में सहयोग करता है। हमें देश-विदेश के साहित्य का, कलाओं का जितना संभव हो, ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, अन्य भाषाओं से ज्ञान प्राप्त कर उससे स्वयं को ज्ञानी बनाया जा सकता है, यह सब अपनी भाषा के ज्ञान से संभव होता है। व्यक्ति अन्य भाषा के ज्ञान को प्राप्त कर अपना ज्ञान तो बढ़ा सकता है। ज्ञान का प्रसार निज अर्थात अपनी भाषा में करना ही उचित होगा।
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| १. | ![]() |
______ |
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______ |
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