Advertisements
Advertisements
प्रश्न
नीचे दिए गए दोहों में बताई गई सच्चाइयों को यदि हम अपने जीवन में उतार लें तो उनके क्या लाभ होंगे? सोचिए और लिखिए-
(क) तरुवर फल ____________ सचहिं सुजान||
(ख) धरती की-सी ____________ यह देह||
Advertisements
उत्तर
(क) हमारे मन में परोपकार की भावना का उदय होगा और हमारे मन से लोभ तथा मोह नष्ट हो जाएगा। लोगों में कटुता, द्वेष तथा विषमता कम होगी और सदभाव बढ़ेगा।
(ख) हमारा शरीर तथा मन सहनशील होगा और हम आने वाले कष्ट के लिए हमेशा तैयार रहेंगे, हमें दुख की अनुभूति कम होगी।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
बहुविकल्पी प्रश्न
कवि अपनी कविता के माध्यम से आह्वान कर रहा है
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
कठपुतली ने अपनी इच्छा प्रकट की
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
कठपुतली गुस्से से क्यों उबल पड़ी
क्या आपको दूसरों के इशारों पर काम करना अच्छा लगता है? इसका तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
यह कविता किस वाद से प्रभावित है?
कविता की इस पंक्ति पर ध्यान दो-
"बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा-भरा रखते हैं।"
अब तुम यह बताओ कि पेड़ों और बच्चों में क्या कुछ समानता है? उसे अपने ढंग से लिखो।
तुम पेड़ों को बचाने के लिए क्या कुछ कर सकते हो? बताओ।
कवि फूलों, गीतों और विद्या की खेती क्यों करना चाहता है?
रिक्त स्थान पूरे करो।
| नमूना → | वह मोर सा नाचता है। |
मेघाश्री की आवाज़ __________ की तरह मीठी है।
'भूखे-प्यासे' में द्वंद्व समास है। इन दोनों शब्दों के बीच लगे चिह्न को सामासिक चिह्न (-) कहते हैं। इस चिह्न से 'और' का संकेत मिलता है, जैसे-
भूखे-प्यासे = भूखे और प्यासे।
• इस प्रकार के दस अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।
बहुविकल्पी प्रश्न
कौन-सी अँगीठी दहक रही है?
बहुविकल्पी प्रश्न
“चिलम आधी होना’ किसका प्रतीक है?
बहुविकल्पी प्रश्न
सूरज डूबते ही क्या हुआ?
बहुविकल्पी प्रश्न
क्या जल मछली से प्रेम करता है?
बहुविकल्पी प्रश्न
पेड़ अपना फल स्वयं क्यों नहीं खाते हैं।
‘जल को मछलियों से कोई प्रेम नहीं होता’ इसका क्या प्रमाण है?
रहीम के दोहों से हमें क्या सीख मिलती है?
नीचे दी गई पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
'सावधान! मेरी वीणा में ______ दोनों मेरी ऐंठी हैं।'
बहुविकल्पी प्रश्न
इस कविता में किसको जगाने का प्रयास किया जा रहा है?
नमूने के अनुसार लिखो:
| नमूना → |
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात।
|
| चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे। |
डाली से डाली पर पहुँचा,
देखी कलियाँ देखे फूल।
