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प्रश्न
नाइट्रोकरण ऐरोमैटिक इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन का एक उदाहरण है और इसकी दर बेन्जीन वलय पर पहले से ही उपस्थित समूह पर निर्भर करती है। बेन्जीन और फ़ीनॉल में से कौन-सा अधिक आसानी से नाइट्रोकृत होगा और क्यों?
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उत्तर
फ़ीनॉल, बेन्जीन से अधिक आसानी से नाइट्रोक़ृत होता है क्योंकि फ़ीनॉल में −OH समूह की उपस्थिति बेन्जीन वलय की ऑथों और पैरा स्थितियों पर +R प्रभाव द्वारा इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ा देती है। नाइट्रोकरण अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन होने के कारण उस स्थान पर अधिक आसानी से होती है जहाँ इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है।
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| (iii) विलियम्सन संश्लेषण | (c) फ़ीनॉल का सैलिसिलऐल्डिहाइड मेंपरिवर्तन |
| (iv) 2° ऐल्कोहॉल का कीटोन में परिवर्तन | (d) काष्ठ स्पिरिट |
| (v) राइमर-टीमन अभिक्रिया | (e) 573 K पर तप्त कॉपर |
| (vi) किण्वन | (f) ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया |
