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प्रश्न
नाइट्रोकरण ऐरोमैटिक इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन का एक उदाहरण है और इसकी दर बेन्जीन वलय पर पहले से ही उपस्थित समूह पर निर्भर करती है। बेन्जीन और फ़ीनॉल में से कौन-सा अधिक आसानी से नाइट्रोकृत होगा और क्यों?
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उत्तर
फ़ीनॉल, बेन्जीन से अधिक आसानी से नाइट्रोक़ृत होता है क्योंकि फ़ीनॉल में −OH समूह की उपस्थिति बेन्जीन वलय की ऑथों और पैरा स्थितियों पर +R प्रभाव द्वारा इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ा देती है। नाइट्रोकरण अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन होने के कारण उस स्थान पर अधिक आसानी से होती है जहाँ इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है।
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(i) Br2/जल
(ii) Na
(iii) उदासीन FeCl3
(iv) उपरोक्त सभी
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कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।
| कॉलम I | कॉलम II |
| (i) कार इंजन में प्रयुक्त होने वाला प्रतिहिम | (a) उदासीन फेरिक क्लोराइड |
| (ii) सुगंध में प्रयुक्त होने वाला विलायक | (b) ग्लिसरॉल |
| (iii) पिक्रिक अम्ल का प्रारंभन पदार्थ | (c) मेथेनॉल |
| (iv) काष्ठ स्पिरिट | (d) फ़ीनॉल |
| (v) फ़ीनॉलिक समूह के संसूचन के लिए प्रयुक्त अभिकर्मक | (e) एथेलीनग्लाइकॉल |
| (vi) साबुन उद्योग का अतिरिक्त उत्पाद जो कांतिवर्धकों में प्रयुक्त होता है | (f) एथेनॉल |
