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मान लीजिए कि A = {a, b, c} तथा A में परिभाषित संबंध R निम्नलिखित है: R = {(a, a), (b, c), (a, b)}. तो उन क्रमित युग्मों की, कम से कम, संख्या लिखिए,

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प्रश्न

मान लीजिए कि A = {a, b, c} तथा A में परिभाषित संबंध R निम्नलिखित है:

R = {(a, a), (b, c), (a, b)}. तो उन क्रमित युग्मों की, कम से कम, संख्या लिखिए, जिनको R में जोड़ने से R स्वतुल्य तथा संक्रामक बन जाता है।

बेरीज
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उत्तर

दिया गया संबंध, R = {(a, a), (b, c), (a, b)}।

R को स्वतुल्य बनाने के लिए, हमें (b, b) और (c, c) को R में जोड़ना होगा।

साथ ही, हमें R को संक्रामक बनाने के लिए (a, c) को R में जोड़ना होगा।

अत: जोड़े जाने वाले क्रमित युग्मों की न्यूनतम संख्या 3 है।

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संबंध एवं फलन
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पाठ 1: संबंध एव फलन - प्रश्नावली [पृष्ठ ११]

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एनसीईआरटी एक्झांप्लर Ganit Exemplar [Hindi] Class 12
पाठ 1 संबंध एव फलन
प्रश्नावली | Q 1 | पृष्ठ ११

संबंधित प्रश्‍न

मान लीजिए कि f : R → R है तब निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित चिन्ह फलन (Signum Function) है |

f(x) = `{(1"," x > 0), (0"," x = 0),(-1"," x < 0):}`

तथा g : R → R, g(x) = [x], द्वारा प्रदत्त महत्तम पूर्णांक फलन है, जहाँ [x], x से कम या x के बराबर पूर्णांक है, तो क्या fog तथा gof, अंतराल [0, 1] में संपाती (coincide) हैं?


यदि A = {1, 2, 3} तथा f, g, A × A के उप-समुच्चय के संग निम्नलिखित प्रकार सूचित संबंध हैं

f = {(1, 3), (2, 3), (3, 2)}

g = {(1, 2), (1, 3), (3, 1)}

f तथा g में से कौन फलन है और क्यों?


यदि A = {a, b, c, d} तथा f = {a, b), (b, d), (c, a), (d, c)} तो सिद्ध कीजिए कि f एकैकी है तथा A से A पर आच्छादि है। f –1 भी ज्ञात कीजिए।


सिद्ध कीजिए कि f(x) = `x/(x^2 + 1)`, ∀ ∈ + R, द्वारा परिभाषित फलन f : R → R न तो एकैकी है और न आच्छादी है।


मान लीजिए कि f(x) = |x| + x तथा g(x) = x – x ∀ x ∈ R द्वारा परिभाषित f, g: R → R दो फलन हैं, तो f o g तथा g o f  ज्ञात कीजिए।


मान लीजिए कि R वास्तविक संख्याओ का समुच्चय है तथा f : R → R एक फलन है, जो f (x) = 4x + 5 द्वारा परिभाषित है। सिद्ध कीजिए कि f व्युत्क्रमणीय है तथा f–1 ज्ञात कीजिए।


f (x) = `sqrt(x^2  –3x +2)`  द्वारा परिभषित फलन f : R → R का प्रांत ______ है। 


मान लीजिए कि Z पूर्णांकों का समुच्चय है तथा R, Z में परिभाषित एक संबंध इस प्रकार है aRb, कि यदि a – b भाज्य है 3 से, तो R समुच्चय Z को ______ युगलत: असंयुक्त उप-समुच्चयों में विभाजन करता है।


मान लीजिए कि A एक परिमित समुच्चय है, तो A से स्वयं A में प्रत्येक एकैक फलन आच्छादी नहीं है।


मान लीजिए C सम्मिश्र संख्याओं का समुच्चय है। सिद्ध कीजिए कि f(z) = |z|, z C द्वारा दिया गया प्रतिचित्रण f: C → R न तो एकैकी है और न ही आच्छादक (आच्छादि) है।


मान लीजिए कि X = {1, 2, 3} तथा Y = {4, 5}। ज्ञात कीजिए कि क्या X ×Y के निम्नलिखित उपसमुच्चय X से Y में फलन हैं या नहीं हैं।

f = {(1, 4), (1, 5), (2, 4), (3, 5)}


मान लीजिए कि X = {1, 2, 3} तथा Y = {4, 5}। ज्ञात कीजिए कि क्या X ×Y के निम्नलिखित उपसमुच्चय X से Y में फलन हैं या नहीं हैं।

h = {(1,4), (2, 5), (3, 5)}


मान लीजिए कि R, प्राकृत संख्याओं के समुच्चय N में निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित एक संबंध है।

R = {(x, y): x ∈ N, y ∈ N, 2x + y = 41}। संबंध R का प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिए। साथ ही सत्यापित (जाँच) कीजिए कि क्या R स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक है।


दिया हुआ है कि A = {2, 3, 4}, B = {2, 5, 6, 7}। निम्नलिखित में से उदाहरण की रचना कीजिए :

A से B में एक एकैक प्रतिचित्रण।


निम्नलिखित में से N में एक संबंध परिभाषित करते है:

x + 4y = 10, x, y ∈ N

निर्धारित कीजिए कि उपर्युक्त संबंधो में से कौन-से संबंध स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक हैं।


मान लीजिए कि एक द्वि-आधारीय संक्रिया * Q में परिभाषित है। ज्ञात कीजिए कि निम्नलिखित द्वि-आधारी संक्रिया में से कौन-कौन सी संक्रिया क्रम-विनिमेय हैं?

a * b = a – b ∀ a, b ∈ Q


मान लीजिए कि f: R → R f(x) = 3x2 - 5 द्वारा तथा g: R → R g(x) = `x/(x^2 + 1)` द्वारा परिभाषित है, तो g o f ______ है।


मान लीजिए f: R → R f(x) = x3 + 5 द्वारा परिभाषित एक फलन है, तो f–1(x)  ______ है।


मान लीजिए कि f: R → R f(x) = tan x द्वारा दत्त है, तो f-1(1) _______ है।


मान लीजिए कि f = {(1, 2), (3, 5), (4, 1) तथा g = {(2, 3), (5, 1), (1, 3)}। तो g o f = ______ तथा f o g = ______।


मान लीजिए कि f: R → R, f(x) = `x/sqrt(1 + x^2)` द्वारा परिभाषित है, तो ( f o f o f ) (x) = ______।


यदि f(x) = (4 - (x - 7)3}, तो f–1(x) = ______।


मान लीजिए कि समुच्चय A = {1, 2, 3} में परिभाषित एक संबंध R = {(3, 1), (1, 3), (3, 3), तो R सममित, संक्रामक है किंतु स्वतुल्य नहीं है।


फलनों का संयोजन साहचर्य होता है।


किसी समुच्चय में किसी द्वी-आधारी संक्रिया का तत्समक अवयव सदैव होता है।


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