Advertisements
Advertisements
प्रश्न
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
एकीभूय यथा सर्वे वर्णा गच्छन्ति शुक्लताम्।
तथा सम्भूय शंसन्ति धर्मा मानवतागुणम्।।
Advertisements
उत्तर १
English:
Similar to how all colours combine to form white, all religions unanimously praise humanity.
उत्तर २
हिंदी:
जिस प्रकार सभी रंग मिलकर सफ़ेद रंग बनाते हैं, उसी प्रकार सभी धर्म एकमत होकर मानवता की प्रशंसा करते हैं।
उत्तर ३
मराठी:
सर्व रंग एकत्र येऊन पांढरे बनतात त्याचप्रमाणे, सर्व धर्म एकमताने मानवतेची प्रशंसा करतात.
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
मनुजा वाचनेनैव बोधन्ते विषयान् बहून्।
दक्षा भवन्ति कार्येषु वाचनेन बहुश्रुताः।।
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
सर्वं व्याप्नोति सलिलं शर्करा लवणं यथा।
एवं मानवताधर्मो धर्मान् व्याप्नोति सर्वथा।।
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
सकला नद्यः कं प्रविशन्ति ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
सङ्गीते स्वराः कीदृशाः ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
भानुः कं प्रकाशयति ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
कां भज इति कविः वदति ?
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
भानुर्भुवनमण्डलम् = ______ + भुवनमण्डलम् ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
व्यवहरेल्लोके = ______ + लोके ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
एषोऽभ्युदयकृत् = एषः + ______।
पाठात् ल्यबन्त-अव्ययानि चित्वा लिखत
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
सर्वधर्मान् परित्यज्य ध्रुवं मानवतां भज । (पूर्वकालवाचकं निष्कासयत।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
त्वं सर्वधर्मान् परित्यज्य मानवतां भज ।
(‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
सर्वे धर्माः मानवतागुणं शंसन्ति ।
(कर्मवाच्ये परिवर्तयत ।)
समानार्थकशब्दमेलनं कुरुत
| 1 | सरि | (अ) | वण |
| 2 | रङ्गः | (आ) | भानुः |
| 3 | अम्भः | (इ) | नदी |
| 4 | दिनकृत् | (ई) | पन्थाः |
| 5 | मार्गः | (उ) | सलि |
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
मानवताधर्मः अभ्युदयकृत् कथं वर्तते?
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
कदा मानवता भवेत्?
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
सर्वे धर्माः मानवताधर्म समाश्रिताः इति सोदाहरणं स्पष्टीकुरुत।
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
' मानवताधर्मः ' इति काव्यस्य आधारेण मानवताधर्मस्य वर्णनं कुरुत ।
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| नर्तिष्यति | ______ | ______ | प्रथमः | लुट् |
'क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| ______ | दिशेथे | ______ | मध्यमः | लट् |
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| ______ | ______ | अमिलाम | उत्तमः | लङ् |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ऋत्विग्भ्याम् | ______ | तृतीय |
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ मम, राजा, एतौ, साधवः)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जृषा - कस्मै, यया, रथैः तीरे)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - मनसा, अस्याः, प्राणान्, अयम्)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मज्जूषा - इमानि, शब्देषु, एतया, बाल्ये)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - त्यजतु, हतः, अब्रूत, पीतः)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ भेतव्यम्, जानाति, ददाति, मुक्तः)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - अददात्, क्रुद्धः, प्रजायते, दृश्यम्)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - याचते, श्रवणीयम्, प्रदत्तवान्, शिक्षयाति)
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ______ | स्रग्भ्य: | चतुर्थी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| दिशि | ______ | ______ | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ______ | योगिषु | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | श्रेष्ठिनौ | ______ | प्रथमा |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| धाम्ना | ______ | ______ | तृतीय |
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
षड्जमूला यथा सर्वे सङ्गीते विविधाः स्वराः।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्माः समाश्रिताः।।
माघ्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
यथैव सकला नद्य: प्रविशन्ति महोदधिम्।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्मा: समाश्रिताः॥
