Advertisements
Advertisements
प्रश्न
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
कदा मानवता भवेत्?
Advertisements
उत्तर १
English
If everyone behaves humanely towards one another, there won’t be any conflicts or fights, and society will be at peace. Everyone will prosper if we can develop/have a mindset of understanding and supporting one another. Peace and mutual cooperation are essential for uplift. Both of these things will be accomplished, and everyone will experience prosperity, by having faith in (accepting) humanism and putting it into practice.
उत्तर २
हिंदी
यदि सभी लोग एक-दूसरे के प्रति मानवीय व्यवहार करें तो कोई झगड़ा-झंझट नहीं होगा और समाज में शांति रहेगी। यदि हम एक-दूसरे को समझने और समर्थन करने की मानसिकता विकसित कर सकें/रख सकें तो हर कोई समृद्ध होगा। उत्थान के लिए शांति एवं आपसी सहयोग आवश्यक है। मानवतावाद में विश्वास (स्वीकार करने) और इसे व्यवहार में लाने से ये दोनों चीजें पूरी होंगी और हर कोई समृद्धि का अनुभव करेगा।
उत्तर ३
मराठी
प्रत्येक व्यक्तीने इतरांशी माणुसकीने वागले तर लोकांमध्ये वाद व भांडणे होणार नाहीत आणि समाजात शांतता नांदेल. एकमेकांना समजून घेण्याची आणि पाठिंबा देण्याची मानसिकता विकसित करणे/असल्याने प्रत्येकाची प्रगती होण्यास मदत होईल. उन्नतीसाठी शांतता आणि परस्पर सहकार्य आवश्यक आहे. मानवतावादावर विश्वास (स्वीकारणे) आणि ते आचरणात आणले तर या दोन्ही गोष्टी साध्य होतील आणि प्रत्येकजण समृद्धीकडे जाईल.
संबंधित प्रश्न
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
मनुजा वाचनेनैव बोधन्ते विषयान् बहून्।
दक्षा भवन्ति कार्येषु वाचनेन बहुश्रुताः।।
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
सङ्गीते स्वराः कीदृशाः ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
भानुः कं प्रकाशयति ?
पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत ।
कां भज इति कविः वदति ?
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
भानुर्भुवनमण्डलम् = ______ + भुवनमण्डलम् ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
व्यवहरेल्लोके = ______ + लोके ।
सन्धिविग्रहं कुरुत ।
एषोऽभ्युदयकृत् = एषः + ______।
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
सर्वधर्मान् परित्यज्य ध्रुवं मानवतां भज । (पूर्वकालवाचकं निष्कासयत।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
नद्यः महोदधिं प्रविशन्ति ।
(कर्तृपदम् एकवचने परिवर्तवत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
त्वं सर्वधर्मान् परित्यज्य मानवतां भज ।
(‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत ।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत
भानुः भुवनमण्डलं प्रकाशयति ।
(णिजन्तं निष्कासयत ।)
समानार्थकशब्दमेलनं कुरुत
| 1 | सरि | (अ) | वण |
| 2 | रङ्गः | (आ) | भानुः |
| 3 | अम्भः | (इ) | नदी |
| 4 | दिनकृत् | (ई) | पन्थाः |
| 5 | मार्गः | (उ) | सलि |
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
सर्वे धर्माः मानवताधर्म समाश्रिताः इति सोदाहरणं स्पष्टीकुरुत।
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
' मानवताधर्मः ' इति काव्यस्य आधारेण मानवताधर्मस्य वर्णनं कुरुत ।
विशेष्यैः रिक्तस्थानानि पूरयत ।
'क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| ______ | दिशेथे | ______ | मध्यमः | लट् |
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
पुरुषः | लकारः |
| ______ | ______ | अमिलाम | उत्तमः | लङ् |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ऋत्विग्भ्याम् | ______ | तृतीय |
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा ~ मम, राजा, एतौ, साधवः)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जृषा - कस्मै, यया, रथैः तीरे)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - मनसा, अस्याः, प्राणान्, अयम्)
नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मज्जूषा - इमानि, शब्देषु, एतया, बाल्ये)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - त्यजतु, हतः, अब्रूत, पीतः)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मञ्जूषा - याचते, श्रवणीयम्, प्रदत्तवान्, शिक्षयाति)
क्रियापदानि धातुसाधित-विशेषणानि च पृथक्कुरुत।
| क्रियापदम् | धातुसाधित -विशेषणम् |
| ______ | ______ |
| ______ | ______ |
(मज्जूषा ~ रमणीयम्, श्रयेत्, प्राप्ता, भुङ्क्ते)
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| दिशि | ______ | ______ | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | ______ | योगिषु | सप्तमी |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| ______ | श्रेष्ठिनौ | ______ | प्रथमा |
नामतालिकां पूरयत
| एव. | द्विव | ब.व | विभक्तिः |
| धाम्ना | ______ | ______ | तृतीय |
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
एकीभूय यथा सर्वे वर्णा गच्छन्ति शुक्लताम्।
तथा सम्भूय शंसन्ति धर्मा मानवतागुणम्।।
माघ्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
यथैव सकला नद्य: प्रविशन्ति महोदधिम्।
तथा मानवताधर्मं सर्वे धर्मा: समाश्रिताः॥
