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प्रश्न
गणतंत्र दिवस पर सम्मानित बच्चों के बहादुरी के प्रसंग पढ़ो और पसंदीदा किसी एक का वर्णन करो।
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उत्तर
गणतंत्र दिवस पर सम्मानित बच्चों के बहादुरी के प्रसंगों में से मेरे पसंदीदा प्रसंग का वर्णन निम्नलिखित है:
५ मई, २०१६ को विशाल ठाकुर घर पर अपनी माँ विमला और छोटे भाई के साथ था। उसके पिता काम से बाहर गए थे। तभी एक अनजान व्यक्ति उनके घर आया और अपने आप को उसके पिता जी का दोस्त बताया। विशाल की माँ ने जब उसके पिता को फोन करके बताया तो उन्होंने उस अनजान व्यक्ति को नहीं पहचाना। फिर वह व्यक्ति शौचालय जाने के बहाने घर के अंदर आया और अपनी जेब से छुरा निकालकर विशाल की माँ के गले पर रखा। उसने विशाल से घर की सारी कीमती चीजें और पैसे लाने के लिए कहा। विशाल उस चोर के पैर पकड़कर अपनी माँ को छोड़ने की गुहार करने लगा और फिर उसने चोर के पैर पकड़कर उसे गिरा दिया। चोर के नीचे गिरते ही सभी ने मिलकर उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। विशाल की इस बहादुरी के लिए उसे गणतंत्र दिवस पर जनरल राष्ट्रीय शौर्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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पूरी वर्णमाला क्रम से पढ़ो:
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।। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ।।

अपने चित्र के बारे में बोलो।

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| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
