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[Fe(CN)6]3– संकुल के विषय में कौन-से विकल्प सही हैं? (i) d2sp3 संकरण (ii) sp3d2 संकरण (iii) अनुचुंबकीय (iv) प्रतिचुंबकीय

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प्रश्न

[Fe(CN)6]3– संकुल के विषय में कौन-से विकल्प सही हैं?

(i) d2sp3 संकरण

(ii) sp3d2 संकरण

(iii) अनुचुंबकीय

(iv) प्रतिचुंबकीय

टीपा लिहा
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उत्तर

(i) d2sp3 संकरण

(iii) अनुचुंबकीय

स्पष्टीकरण:

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास Fe(26) = 1s2, 2s2, 2p6, 3s2, 3p6, 4s2, 3d6

CN में एक मजबूत क्षेत्र लिगैंड और इलेक्ट्रॉन जोड़ी है।

अत: अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 तथा अनुचुंबकीय है।

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उपसहसंयोजन यौगिकों में आंबधन
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 9: उपसहसंयोजन यौगिक - अभ्यास [पृष्ठ १३१]

APPEARS IN

एनसीईआरटी एक्झांप्लर Rasayan Vigyaan [Hindi] Class 12
पाठ 9 उपसहसंयोजन यौगिक
अभ्यास | Q II. 17. | पृष्ठ १३१

संबंधित प्रश्‍न

उपसहसंयोजन यौगिकों का रंग क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन पर निर्भर करता है। संकुलों [Co(NH3)6]3+, [Co(CN)6]3− तथा [Co(H2O)6]3+ का दृश्य क्षेत्र में तरंगदैर्घ्य के अवशोषण का सही क्रम क्या होगा?


अष्टफलकीय [CoCl6]4− के लिए CFSE 18,000 cm−1 है, तो चतुष्फलकीय [CoCl4]2− की CFSE होगी ______।


Mn, Fe, Co और Ni की परमाणु संख्या क्रमशः 25, 26, 27 और 28 है। निम्नलिखित में से किन वाह्य कक्षक अष्टफलकीय संकुलों में अयुगलित इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है?
(i) [MnCl6]3–
(ii) [FeF6]3–
(iii) [CoF6]3–
(iv) [Ni(NH3)6]2+

[MnCl4]2− का चुंबकीय आघूर्ण 5.92 BM है। इसे कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि Co(III) दुर्बल क्षेत्र लिगंड के साथ अनुचुंबकीय अष्टफलकीय संकुल क्यों बनाता है जबकि प्रबल क्षेत्र लिगंड के साथ यह प्रतिचुंबकीय अष्टफलकीय संकुल बनाता है।


CuSO4.5H2O का रंग नीला होता है जबकि CuSO4 रंगहीन होता है क्यों?


कॉलम I में दिए संकुल आयनों और कॉलम II में दिए संकरण तथा अयुगलित इलेक्ट्रॉनों की संख्या को सुमेलित कीजिए और सही कोड प्रदान कीजिए।

कॉलम I (संकुल आयन) कॉलम II (संकरण, अयुगलित इलेक्ट्रॉनों की संख्या)
(A) [Cr(H2O)6]3+ (1) dsp2, 1
(B) [Co(CN)4]2– (2) sp3d2, 5
(C) [Ni(NH3)6]2+ (3) d2sp3, 3
(D) [MnF6]4– (4) sp3, 4
  (5) sp3d2, 2

अभिकथन: ​[Cr(H2O)6]Cl2 और [Fe(H2O)6]Cl2 अपचायी प्रकृति के होते हैं।

तर्क: इनके d-कक्षकों में अयुगलित इलेक्ट्रॉन होते हैं।


अभिकथन: ([Fe(CN)6]3− आयन दो अयुगलित इलेक्ट्रॉनों के समकक्ष चुंबकीय आघूर्ण प्रदर्शित करता है।

तर्क - क्योंकि इसमें d2sp3 संकरण होता है।


क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन सिद्धांत का प्रयोग करते हुए ऊर्जा स्तर आलेख बनाइए और निम्नलिखित में केंद्रीय धातु परमाणु/आयन का इलेक्ट्रॉनी विन्यास लिखकर चुंबकीय आघूर्ण का मान निर्धारित कीजिए।

[CoF6]3–, [Co(H2O)6]2+, [Co(CN)6]3–


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