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प्रश्न
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उत्तर
मान लीजिए चुंबकीय आघूर्ण का 5.92 BM Mn2+ के d-कक्षकों के पाँच अयुगलित इलेक्ट्रॉनों के अनुरूप है। परिणामस्वरूप निहित संकरण dsp2 के बजाय sp3 होता है। अतः [MnCl4]2− की चतुष्फलकीय संरचना के चुंबकीय आघूर्ण का मान 5.92 BM होता है।
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संबंधित प्रश्न
[Fe(CN)6]3– संकुल के विषय में कौन-से विकल्प सही हैं?
(i) d2sp3 संकरण
(ii) sp3d2 संकरण
(iii) अनुचुंबकीय
(iv) प्रतिचुंबकीय
निम्नलिखित संकुल आयनों को क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा (Δ0) के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
[Cr(Cl)6]3–, [Cr(CN)6]3–, [Cr(NH3)6]3+
अभिकथन: [Cr(H2O)6]Cl2 और [Fe(H2O)6]Cl2 अपचायी प्रकृति के होते हैं।
तर्क: इनके d-कक्षकों में अयुगलित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन सिद्धांत का प्रयोग करते हुए ऊर्जा स्तर आलेख बनाइए और निम्नलिखित में केंद्रीय धातु परमाणु/आयन का इलेक्ट्रॉनी विन्यास लिखकर चुंबकीय आघूर्ण का मान निर्धारित कीजिए।
[FeF6]3–, [Fe(H2O)6]2+, [Fe(CN)6]4–
संयोजकता आबंध सिद्धांत द्वारा [Co(NH3)6]3+ के संबंध में निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए।
- संकरण का प्रकार
- आंतरिक अथवा बाह्य कक्षक संकुल
- चुंबकीय व्यवहार
- केवल प्रचक्रण चुंबकीय आघूर्ण मान
संयोजकता आबंध सिद्धांत द्वारा [Cr(H2O)6]3+ के संबंध में निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए।
- संकरण का प्रकार
- आंतरिक अथवा बाह्य कक्षक संकुल
- चुंबकीय व्यवहार
- केवल प्रचक्रण चुंबकीय आघूर्ण मान
संयोजकता आबंध सिद्धांत द्वारा [FeCl6]4− के संबंध में निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए।
- संकरण का प्रकार
- आंतरिक अथवा बाह्य कक्षक संकुल
- चुंबकीय व्यवहार
- केवल प्रचक्रण चुंबकीय आघूर्ण मान
उसी धातु और उन्हीं लिगंडों वाले अष्टफलकीय और चतुष्फलकीय संकुलों का रंग भिन्न क्यों होता है?
