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कृति पूर्ण करो : धरती का आँगन इनसे महक

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प्रश्न

कृति पूर्ण करो :

सारिणी
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उत्तर

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पद्य (8th Standard)
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अध्याय 2.1: धरती का आँगन महके - सूचना के अनुसार कृतियाँ करो [पृष्ठ २६]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
अध्याय 2.1 धरती का आँगन महके
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो | Q 2.1 | पृष्ठ २६

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कृति पूर्ण करो :


एक शब्‍द में उत्‍तर लिखो :

प्रतिदिन सुनने/सुनाने योग्‍य नाम - ______


एक शब्‍द में उत्‍तर लिखो :

मातृभूमि के सपूत - ______


तुलना करो :

गाँव शहर
______ ______
______ ______
______ ______

कृति पूर्ण करो :


कविता की अंतिम चार पंक्‍तियों का अर्थ लिखो।

बात बेबात कोई चुभने लगे तो,
बदलकर उसे मोड़ना सीख लीजे।

ये किसने कहा होंठ सीकर के बैठो,
जरूरत पे मुँह खोलना सीख लीजे।


कृति पूर्ण करो :


कविता में इस अर्थ में आए शब्‍द लिखो :

कोई


कविता में इस अर्थ में आए शब्‍द लिखो :

बलराम


कृति पूर्ण करो :


कृति पूर्ण करो :


उत्‍तर लिखो :

मेधा की ऊँचाई नापेगा 


कृति पूर्ण करो :

इन बातों में अलग होकर भी हम सब एक हैं -

  • ______
  • ______

कृति पूर्ण करो :

बगिया की शान -

  • ______
  • ______

कविता (सौहार्द-सौमनस्य) में इस अर्थ में प्रयुक्‍त शब्‍द लिखो:

तिरस्‍कार


संजाल पूर्ण करो :


कृति करो :

 


अंतिम चार पंक्‍तियों का अर्थ लिखो।

चख-चख जीवन मधुरस प्रतिक्षण
विपुल मनोवैभव कर संचित,
जन मधुकर अनुभूति द्रवित जब
करते भव मधु छत्र विनिर्मित
नहीं प्रार्थना इससे शुचितर !


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