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कविता की पंक्‍तियाँ पूर्ण करो : सेवा में तेरी ____________; __________________ ।। __________________ । बलिदान मैं जाऊँ ।।

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प्रश्न

कविता की पंक्‍तियाँ पूर्ण करो :

सेवा में तेरी ____________;
__________________ ।।
__________________ ।
बलिदान मैं जाऊँ ।।

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उत्तर

सेवा में तेरी माता! मैं भेदभाव तजकर;
वह पुण्य नाम तेरा, प्रतिदिन सुनूँ-सुनाऊँ।।
तेरे ही काम आऊँ, तेरा ही मंत्र गाऊँ।
मन और देह तुम पर बलिदान मैं जाऊँ।।

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पद्य (8th Standard)
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अध्याय 1.1: हे मातृभूमि ! - सूचना के अनुसार कृतियाँ करो [पृष्ठ २]

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बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
अध्याय 1.1 हे मातृभूमि !
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो | Q (४) | पृष्ठ २

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एक शब्‍द में उत्‍तर लिखो :

मातृभूमि के चरणों में इसे नवाना है - ______


उचित जोड़ियाँ मिलाओ :

अ उत्‍तर आ
१. मेट्रो ______ गाँव
२. पीपल ______ कस्‍बा
    शहर

कृति पूर्ण करो :


एक शब्‍द में उत्‍तर लिखो :

बदले-से लगते हैं - ______


एक शब्‍द में उत्‍तर लिखो :

लँगड़ाकर चलने वाली - ______


प्रवाह तालिका पूर्ण करो :


उत्‍तर लिखो :

चुभने वाली 


कृति पूर्ण करो :


कविता में इस अर्थ में आए शब्‍द लिखो :

ठंडा


प्रवाह तालिका पूर्ण करो:


कृति पूर्ण करो :


उत्‍तर लिखो :

मेधा की ऊँचाई नापेगा 


कृति पूर्ण करो :

इन बातों में अलग होकर भी हम सब एक हैं -

  • ______
  • ______

कविता (सौहार्द-सौमनस्य) में इस अर्थ में प्रयुक्‍त शब्‍द लिखो :

दीपक


कविता (सौहार्द-सौमनस्‍य) में इस अर्थ में प्रयुक्‍त शब्‍द लिखो :

प्रेम


कविता (सौहार्द-सौमनस्‍य) में इस अर्थ में प्रयुक्‍त शब्‍द लिखो :

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संजाल पूर्ण करो :


अंतिम चार पंक्‍तियों का अर्थ लिखो।

चख-चख जीवन मधुरस प्रतिक्षण
विपुल मनोवैभव कर संचित,
जन मधुकर अनुभूति द्रवित जब
करते भव मधु छत्र विनिर्मित
नहीं प्रार्थना इससे शुचितर !


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