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प्रश्न
'क्रोध से बात और अधिक बिगड़ जाती है।' 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' कविता के आलोक में इस कथन की पुष्टि कीजिए।
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उत्तर
क्रोध से बात और अधिक बिगड़ने की संभावना रहती है। क्रोधी व्यक्ति का वाणी पर नियंत्रण नहीं होता। प्रत्युत्तर में विपक्षी भी कटु व व्यंग्य वचन सुनाता है। पाठ में भी परशुराम जी के क्रोध करने के कारण लक्ष्मण जी ने भी उनकी अवस्था व पद का ध्यान न रखकर उन्हें कठोर उत्तर दिए, यदि श्रीराम की विनम्रता बीच में न होती, तो न जाने परिणाम क्या हो सकता था?
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इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं||
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बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।। |
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D. महाराज जनक को भयभीत करने के लिए - निम्नलिखित पंक्तियों में से किस पंक्ति से लक्ष्मण की शक्तिशाली होने का पता चलता है:
A. बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।
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C. देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।
D. इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं ।। - रघुकुल में किन-किन के प्रति अपनी वीरता का प्रदर्शन नहीं किया जाता है?
A. देवता, ब्राम्हण, ईश्वर भक्त और गाय पर
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D. स्त्रियों, बच्चों, राजा और गाय पर - 'बिहसि लखन बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी' यह कथन ______ का उदाहरण है।
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