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प्रश्न
भाव स्पष्ट कीजिए -
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।
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उत्तर
प्रसंग - प्रस्तुत पंक्तियाँ तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस से ली गई हैं। उक्त पंक्तियों में लक्ष्मण जी द्वारा परशुराम जी के बोले हुए अपशब्दों का प्रतिउत्तर दिया गया है।
भाव - भाव यह है कि लक्ष्मण जी मुस्कराते हुए मधुर वाणी में परशुराम पर व्यंग्य कसते हुए कहते हैं कि हे मुनि आप अपने अभिमान के वश में हैं। मैं इस संसार का श्रेष्ठ योद्धा हूँ। आप मुझे बार-बार अपना फरसा दिखाकर डरा रहे हैं। आपको देखकर तो ऐसा लगता है मानो फूँक से पहाड़ उड़ाने का प्रयास कर रहे हों। अर्थात् जिस तरह एक फूँक से पहाड़ नहीं उड़ सकता उसी प्रकार मुझे बालक समझने की भूल मत किजिए कि मैं आपके इस फरसे को देखकर डर जाऊँगा।
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बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।। |
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A. बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।
B. पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।
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A. देवता, ब्राम्हण, ईश्वर भक्त और गाय पर
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D. स्त्रियों, बच्चों, राजा और गाय पर - 'बिहसि लखन बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी' यह कथन ______ का उदाहरण है।
A. व्यंग्य
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