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लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

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प्रश्न

लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

लक्ष्मण: (मुस्कुराते हुए) हे मुनिवर! आप बार-बार अपना फरसा दिखाकर मुझे भयभीत करने का प्रयत्न क्यों कर रहे हैं? मैं कोई नाजुक बेल नहीं हूँ, जो आपकी भौंहों के इशारे मात्र से ही घबरा जाऊँ।

परशुराम: (क्रोधित होकर) हे राजकुमार! क्या तुम मेरे पराक्रम का सामना कर सकते हो? मेरा यह भयंकर परशु अनेक क्षत्रियों का संहार कर चुका है।

लक्ष्मण: हे महावीर! शौर्य वचनों से नहीं, कर्मों से सिद्ध होता है। यदि आपको अपनी वीरता पर इतना अभिमान है तो शांत क्यों नहीं रहते? श्रेष्ठ पुरुषों को सम्मान उनके बड़प्पन से ही प्राप्त होता है।

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राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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अध्याय 2: तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १४]

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एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 Class 10
अध्याय 2 तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ १४

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निम्नलिखित पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा।

बार बार मोहि लागि बोलावा||


“सामाजिक जीवन में क्रोध की जरूरत बराबर पड़ती है। यदि क्रोध न हो तो मनुष्य दूसरे के द्वारा पहुँचाए जाने वाले बहुत से कष्टों की चिर-निवृत्ति का उपाय ही न कर सके।”

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का यह कथन इस बात की पुष्टि करता है कि क्रोध हमेशा नकारात्मक भाव लिए नहीं होता बल्कि कभी-कभी सकारात्मक भी होता है। इसके पक्ष या विपक्ष में अपना मत प्रकट कीजिए।


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