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इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

स्पष्ट कीजिए
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उत्तर

तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के इस कांव्याँश में तुलसीदास जी ने लक्ष्मण जी के माध्यम से स्थान-स्थान पर व्यंग्य का अनूठा प्रयोग किया है। उदाहरण के लिए -

  1. बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।
    लक्ष्मण जी परशुराम जी से धनुष को तोड़ने का व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि हमने अपने बालपन में ऐसे अनेकों धनुष तोड़े हैं तब हम पर कभी क्रोध नहीं किया।
  2. गाधिसू नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।
    अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।
    यहाँ विश्वामित्र जी परशुराम की बुद्धि पर मन ही मन व्यंग्य कसते हैं और मन ही मन कहते हैं कि परशुराम जी राम, लक्ष्मण को साधारण बालक समझ रहे हैं। उन्हें तो चारों ओर हरा ही हरा सूझ रहा है, जो लोहे की तलवार को गन्ने की खाँड़ से तुलना कर रहे हैं।
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राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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अध्याय 2: तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Kshitij Bhag 2 Class 10
अध्याय 2 तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
प्रश्न-अभ्यास | Q 9. | पृष्ठ १४

संबंधित प्रश्न

लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।


परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए -

बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही।।
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।

मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।


साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।


भाव स्पष्ट कीजिए -

बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।


भाव स्पष्ट कीजिए -

इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।


पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।


निम्नलिखित पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।


निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु।

बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु||


संकलित अंश में राम का व्यवहार विनयपूर्ण और संयन्न है, लक्ष्मण लगातार व्यंग्य बाणों का उपयोग करते हैं और परशुराम का व्यवहार क्रोध से भरा हुआ है। आप अपने आपको इस परिस्थिति में रखकर लिखें कि आपका व्यवहार कैसा होता?


अपने किसी परिचित या मित्र के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।


उन घटनाओं को याद करके लिखिए जब आपने अन्याय का प्रतिकार किया हो।


अवधी भाषा आज किन-किन क्षेत्रों में बोली जाती है?


परशुराम ने अपनी कौन-कौन-सी विशेषताओं द्वारा लक्ष्मण को डराने का प्रयास किया?


लक्ष्मण ने क्या-क्या कहकर परशुराम पर व्यंग्य किया?


लक्ष्मण अपने कुल की किस परंपरा का हवाला देकर युद्ध करने से बच रहे थे?


परशुराम विश्वामित्र से लक्ष्मण की शिकायत किस तरह करते हैं?


'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' में परशुराम बार-बार विश्वामित्र से लक्ष्मण की शिकायत क्यों कर रहे हैं?


लक्ष्मण ने वीरों के क्या लक्षण बताए?


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