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इच्छा होते हुए भी लेखक और नवाब साहब दोनों के खीरा न खाने का कारण ‘लखनवी अंदाज’ पाठ के आधार पर बताइए।

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प्रश्न

इच्छा होते हुए भी लेखक और नवाब साहब दोनों के खीरा न खाने का कारण ‘लखनवी अंदाज’ पाठ के आधार पर बताइए।

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उत्तर

खीरा खाने की इच्छा होते हुए भी लेखक ने उसे खाने से इनकार इसलिए कर दिया कि जब उन्होंने नवाब साहब की भाव-भंगिमा देखी तो फिर लेखक के मन में विचार आया कि नवाब साहब का मुँह खीरे के स्वाद की कल्पना से ही भर गया है। पूर्व में इनकार कर चुकने के कारण आत्मसम्मान की रक्षा के लिए लेखक ने खीरा खाने से इनकार कर दिया। नवाब साहब के अंदर पूरा नवाबी अभिमान था जिसके कारण वह खीरे को तुच्छ पदार्थ दिखाते हुए उसे बाहर फैंक देते हैं। नवाब की इस अदा से यह सूचित हो रहा है कि नवाबी लोग गरीबों की तरह खीरे पर नहीं टूटते बल्कि ऐसी छोटी चीज़ों को देखने और सुँघने मात्र से ही उनका पेट भर जाता है।

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लखनवी अंदाज़
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2021-2022 (March) Delhi Set 2

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