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भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।

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प्रश्न

भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।

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मनुष्यता
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अध्याय 1.4: मनुष्यता - परियोजना कार्य [पृष्ठ २३]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
अध्याय 1.4 मनुष्यता
परियोजना कार्य | Q 2 | पृष्ठ २३

संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने दधीचि कर्णआदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
'मनुष्य मात्र बंधु है'से आप क्या समझते हैंस्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए 
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?


निम्नलिखित प्रश्न का भाव स्पष्ट कीजिए −
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँत्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।


‘विचार लो कि मर्त्य हो’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है? इसे सुमृत्यु कैसे बनाया जा सकता है?


उशीनर कौन थे? उनके परोपकार का वर्णन कीजिए।


अपने लिए जीने वाला कभी मरता नहीं’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?


कवि ने सफलता पाने के लिए मनुष्य को किस तरह प्रयास करने के लिए कहा है?


‘रहो न यों कि एक से न काम और का सरे’ के माध्यम से कवि क्या सीख देना चाहता है?


‘मनुष्यता’ कविता की वर्तमान में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।


दुनिया भर में असहिष्णुता लगभग आम हो गई है। जाति, धर्म, रंग और वैचारिक रूप से भिन्न दृष्टिकोण रखने वाले लोगों के प्रति असहिष्णुता की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। सहिष्णुता की परिभाषा पर विचार करें तो जिस विश्वास और प्रथा को हम पसंद नहीं करते उसमें बाधा डालने की बजाय संयम बरतना ही सहिष्णुता है।

कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा, ‘अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।’ इस पंक्ति की सार्थकता व वर्तमान समय में इसका औचित्य स्थापित कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:

‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सबको साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।


निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उपयुक्त कथन चुनिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'मानव जीवन का सबसे बड़ा भय मृत्यु ही है, फिर भी 'मनुष्यता' कविता में कवि ने मृत्यु से भयभीत न होने की बात क्यों कही है?


निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:

विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी।
हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।
वहीं पशु प्रवत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।
  1. कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए?   [1]
    1. मृत्यु से यश प्राप्त होता है
    2. जन्म - मरण ईश्वर के हाथ में है
    3. मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
    4. मृत्यु तो अवश्यंभावी है
  2. कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है?    [1]
    1. बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
    2. अपनों के हित प्राप्त होनेवाली मृत्यु
    3. महान उद्देश्य के लिए मरनेवाले की मृत्यु
    4. स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
  3. कैसी मृत्यु व्यर्थ है?    [1]
    1. देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
    2. जिस मृत्यु को याद न किया जाए
    3. दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
    4. मृत्यु के बाद हमेशा याद रहे
  4. पशु प्रवृत्ति क्या है?    [1]
    1. अपने लिए जीना - खाना
    2. दूसरों के लिए जीना - खाना
    3. परोपकार का भाव रखना
    4. दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
  5. कौन/सा से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं?    [1]
    1. उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता - मरता है।
    2. पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए।
    3. मनुष्य जीवन की सार्थकता पररोपकार में है।
    4. जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है।
      विकल्प:
      1. केवल I
      2. II, IV
      3. I, III
      4. II, III

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