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अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो : इसे हिमालय क्यों कहते हैं ?

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प्रश्न

अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो :

इसे हिमालय क्यों कहते हैं ?

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

इसे हिमालय क्यों कहते हैं ? - प्रश्नार्थक वाक्य

shaalaa.com
व्याकरण
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अध्याय 1.08: जीवन नहीं मरा करता है - भाषा की ओर [पृष्ठ ५०]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
अध्याय 1.08 जीवन नहीं मरा करता है
भाषा की ओर | Q १. (३) | पृष्ठ ५०

संबंधित प्रश्न

निम्‍न विरमचिन्ह का नाम लिखकर उनका वाक्‍य में प्रयोग करो :

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पाठ्‌यपुस्‍तक के पाठों से विलोम और समानार्थी शब्‍द ढूँढ़कर उनकी सूची बनाओ और उनका अलग-अलग वाक्‍यों में प्रयोग करो।


उपसर्ग/प्रत्‍यय अलग करके मूल शब्‍द लिखो :

भारतीय, आस्‍थावान, व्यक्‍तित्‍व, स्‍नेहिल, बेबात, निरादर, प्रत्‍येक, सुयोग


पाठों में आए सभी प्रकार के सर्वनाम ढूँढ़कर उनका अपने वाक्यों में प्रयोग करो।


शालेय बैंड पथक के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने हेतु अपने विद्‍यालय के प्राचार्य से विद्‌यार्थी प्रतिनिधि के नाते अनुमति माँगते हुए निम्‍न प्रारूप में पत्र लिखो:

दिनांक:
प्रति,

______
______

विषय : ______
संदर्भ : ______

महोदय,
विषय विवेचन

                    ______________________________

                    ______________________________

                    ______________________________

आपका/आपकी आज्ञाकारी,
______________________________
(विद्‍यार्थी प्रतिनिधि)
कक्षा : ______


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

बिल्‍ली भी कम समझदार जानवर नहीं है।


निम्न संधि का विग्रह कर उसका प्रकार लिखिए:

हमारी मंजिल थी सूर्यास्‍त केंद्र बिंदु।


निम्नलिखित मुहावरा/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:

कमर बंद करना - .......... .......... ..........


निम्नलिखित शब्दों के लिंग बदलो और वाक्य बनाकर लिखो: 

१. चाचा जी प्रकल्प में मेरा मार्गदर्शन करते हैं।

५. ______________________________ 

२. ______________________________

६. ______________________________
३. ______________________________ ७. ______________________________

४. ______________________________

८. ______________________________

सूचना, निर्देश, आदेश, अनुरोध, विनती के वाक्य विरामचिह्‌न सहित पढ़ो और समझो :

जैसे - फल, सब्जी लेकर घर आओ।


सूचना, निर्देश, आदेश, अनुरोध, विनती के वाक्य विरामचिह्‌न सहित पढ़ो और समझो :

बच्चों ने कहा, ‘‘कृपया हमें अंतरिक्ष के बारे में बताऍं।’’


निम्नलिखित कारकों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो।

ने ______
को ______
से ______
को ______
से ______
का, की, के ______
में, पर ______
अरे! ______

‘खेलना’ इस क्रिया के सकर्मक, अकर्मक, संयुक्त, सहायक और प्रेरणार्थक रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो और लिखो।


मौन वाचन करो और आपस में श्रुतलेखन करो :

१. सेवा डॉक्टर का कर्तव्य है |

२. पौधे लगाओ, प्रदुषण हटाओ |

३. राष्ट्रीय संपदा, स्वच्छ रखें सर्वदा |

४. मक्खी, मच्छर भगाओ, रोग मिटाओ |

५. रक्तदान-जीवनदान, नेत्रदान-श्रेष्ट दान |

६. विश्वास रखो, अंधविश्वास नहीं |

७. बेईमानी ठुकराओ, ईमानदारी अपनाओ |

८. इंद्रधनुष के रंगों की तरह मिलकर रहो |


निम्न शब्द के तीन पर्यायवाची शब्‍द रिक्‍त स्‍थान में लिखिए:-

शब्द पर्यायवाची शब्द
सुगंध        

शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह   शब्द विलोम
अति + अधिक   × न्यूनतम

इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्‍सम, तद्भव शब्‍द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्‍द ढूँढ़िए।

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

असामाजिक गतिविधियों के कारण वह दंडित हुआ।


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

मानो मुझे अपमानित कर रहा हो।


अर्थ की दृष्टि से वाक्य परिवर्तित करके लिखिए :


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