English

SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] - Maharashtra State Board Question Bank Solutions

Advertisements
[object Object]
[object Object]
Subjects
Popular subjects
Topics

Please select a subject first

Advertisements
Advertisements
< prev  1261 to 1280 of 4888  next > 

अलंकार के भेदों सहित अन्य एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्‍सम, तद्भव शब्‍द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्‍द ढूँढ़िए।

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

Advertisements

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।

उपर्युक्‍त अंश से पंद्रह शब्‍द ढूँढ़िए उनमें प्रत्‍यय लगाकर शब्‍दों को पुनः लिखिए।

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

कवि के अनुसार अकल्‍पित कल्‍पनाएँ

[9] बादल को घिरते देखा है
Chapter: [9] बादल को घिरते देखा है
Concept: undefined >> undefined

आकृति पूर्ण कीजिए:

[9] बादल को घिरते देखा है
Chapter: [9] बादल को घिरते देखा है
Concept: undefined >> undefined

भावार्थ लिखिए:-

ॠतु बसंत का सुप्रभात था
मंद-मंद था अनिल बह रहा
बालारुण की मृदु किरणें थीं
अगल-बगल स्‍वर्णाभ शिखर थे
एक-दूसरे से विरहित हो
अलग-अलग रहकर ही जिनको
सारी रात बितानी होगी,
[9] बादल को घिरते देखा है
Chapter: [9] बादल को घिरते देखा है
Concept: undefined >> undefined

अंतरजाल से बादल, हिमवर्षा, कोहरा, तुषार संबंधी जानकारी प्राप्त कीजिए।

[9] बादल को घिरते देखा है
Chapter: [9] बादल को घिरते देखा है
Concept: undefined >> undefined

‘क्षमाशीलता दुर्बलता नहीं’, इस विचार पर टिप्पणी तैयार कीजिए।

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

‘मन, वाणी, व्यवहारों में संयम ये मानवता के सोपान हैं’ इसपर अपने विचार व्यक्‍त कीजिए।

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

कृति कीजिए:

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

एक शब्‍द में उत्‍तर लिखिए:-

क्रोध का एक हल्‍का रूप = ______ 

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

एक शब्‍द में उत्‍तर लिखिए:-

बच्चों को इन्हें चिढ़ाने में आनंद आता है = ______ 

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

उत्‍तर लिखिए:

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

उत्‍तर लिखिए:

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

‘क्रोध मनुष्य का मानसिक स्वास्‍थ्‍य बिगाड़ता है’, इस बारे में अपने विचार लिखिए।

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

चरित्र समृद्ध बनाने के लिए जिन गुणों की आवश्यकता है, उनकी सूची बनाइए।

[10] क्रोध (पूरक पठन)
Chapter: [10] क्रोध (पूरक पठन)
Concept: undefined >> undefined

‘शिक्षक दिवस’ पर उत्कृष्ट कार्य हेतु विद्यालय द्वारा शिक्षक को सम्‍मानपत्र देकर उनका अभिनंदन किया जा रहा है। इस सम्‍मानपत्र से अव्यय ढूँढ़कर उनसे अन्य वाक्‍य बनाइए:-

सम्‍मानपत्र

श्री/श्रीमती. ______
विद्यालय का नाम:______
पता:- ______
सम्‍माननीय,

आज डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्म दिन ‘शिक्षक दिवस’ पर आयोजित अभिनंदन समारोह में हम आपको अपने बीच पाकर हर्षित व गौरवान्वित हैं।

आपके मार्गदर्शन में प्राप्त उपलब्धियों पर संपूर्ण विद्यालय, परिवेश व समाज को गर्व है। आपने न केवल विद्यार्थियों की बहुमुखी प्रतिभा और असाधारण योग्यता को उभारा वरन प्रेणाप्रद सफलता भी दिलवाई। आपके इस कार्य तथा आपके अन्य अति विशिष्ट कार्यों के लिए विद्यालय आप का अभिनंदन करते हुए गर्व का अनुभव करता। आपके सहयोग से विद्यालय का विकास अक्षुण्ण होता रहा है।

हे! गुरुवर्य, आप सदैव स्वस्थ-संपन्न रहें एवं दीर्घायु हों, ऐसी हम सबकी आत्मिक कामना है। अनंत हार्दिक शुभकामनाओं सहित ...

दिनांक:- ५ सितंबर २०१७

शिक्षक दिवस
स्थान:- विद्यालय सभागार
समय:- प्रातः १०ः३० बजे

विद्यालय प्रमुख
क, ख, ग

निर्देशानुसार अव्यय परिवर्तित करके लिखिए:-

क्र.  अव्यय भेद  अव्यय शब्‍द  अन्य वाक्‍य
1. क्रिया विशेषण    
2. संबंध बोध    
3. समुच्चय बोधक    
4. विस्‍मयादि बोधक वाचक    
[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

संजाल पूर्ण कीजिए:

[11] अद्भुत वीर
Chapter: [11] अद्भुत वीर
Concept: undefined >> undefined

प्रवाह तख्ता पूर्ण कीजिए:

[11] अद्भुत वीर
Chapter: [11] अद्भुत वीर
Concept: undefined >> undefined

आकृति पूर्ण कीजिए:

[11] अद्भुत वीर
Chapter: [11] अद्भुत वीर
Concept: undefined >> undefined
< prev  1261 to 1280 of 4888  next > 
Advertisements
Advertisements
Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Question Bank Solutions
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] English (Second/Third Language)
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Geography [भूगोल]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Hindi [हिंदी]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] History and Political Science [इतिहास और राजनीति शास्त्र]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Marathi - Composite [[मराठी - संयुक्त (द्वितीय भाषा)]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 1 - Algebra [गणित १ - बीजगणित]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Mathematics 2 - Geometry [गणित २ - ज्यामिति]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Sanskrit (Second Language) [संस्कृत (द्वितीय भाषा)]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Sanskrit - Composite [संस्कृत - संयुक्त (द्वितीय भाषा)]
Question Bank Solutions for Maharashtra State Board SSC (Hindi Medium) 9th Standard [९ वीं कक्षा] Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी]
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×