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HSC Science (General) 12th Standard Board Exam - Maharashtra State Board Question Bank Solutions

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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

रोचक प्रसंगों के साथ स्नेहा विद्यार्थियों को फीचर लेखन की विशेषताएँ बताने लगी, “अच्छा फीचर नवीनतम जानकारी से परिपूर्ण होता है। किसी घटना की सत्यता अथवा तथ्यंता फीचर का मुख्य तत्व है। फीचर लेखन में राष्ट्रीय स्तर के तथा अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों का समावेश होना चाहिए क्योंकि समाचार पत्र दूर-दूर तक जाते हैं। इतना ही नहीं ; फीचर का विषय समसामयिक होना चाहिए। फीचर लेखन में भावप्रधानता होनी चाहिए क्योंकि नीरस फीचर कोई नहीं पढ़ना चाहता। फीचर के विषय से संबंधित तथ्यों का आधार दिया जाना चाहिए। '' स्नेहा आगे बोलती जा रही थी,' विश्वसनीयता के लिए फीचर में विषय की तार्किकता को देना आवश्यक होता है। तार्किकता के बिना फीचर अविश्वसनीय बन जाता है। फीचर में विषय की नवीनता का होना आवश्यक है क्योंकि उसके अभाव में 'फीचर अपठनीय बन जाता है। फीचर में किसी व्यक्ति अथवा घटना विशेष का उदाहरण दिया गया हो तो उसकी संक्षिप्त जानकारी भी देनी चाहिए।''

पाठक की मानसिक योग्यता और शैक्षिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर फीचर लेखन किया जाना चाहिए। उसे प्रभावी बनाने हेतु प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों, उदाहरणों, लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग फीचर में चार चाँद लगा देता है।

1. प्रश्न के उत्तर लिखिए।   (2)

  1. फीचर का मुख्य तत्त्व लिखिए।
  2. फीचर लेखन में भाव प्रधानता क्यों होनी चाहिए?
  3. किस के बिना फीचर अविश्वसनीय बन जाता है?
  4. फीचर लेखन में किससे चार चाँद लगते है?

2. निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी शब्द लिखिए।  (2)

  1. नीरस × ______
  2. निष्पक्ष × ______
  3. विख्यात × ______
  4. क्लीष्ट × ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए।  (2)

लता मगेंशकर का फीचर लेखन कीजिए।

[15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
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पल्लवन में सूक्ति, उक्ति, पंक्ति या काव्यांश का ______ किया जाता है।

[14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
Chapter: [14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
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फीचर लेखक को ______ रूप से अपना मत व्यक्त करना चाहिए।

[15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
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शासकीय एवं राजनीतिक समारोह के सूत्र संचालन में इसका बहुत ध्यान रखना पड़ता है।

[16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
Chapter: [16] व्यावहारिक हिंदी : मैं उद्घोषक
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ब्लॉग लेखन से यह लाभ भी होता है।

[17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
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निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

आरा शहर। भादों का महीना। कृष्ण पक्ष की अँधेरी रात। जोरों की बारिश। हमेशा की भाँति बिजली का गुल हो जाना। रात के 'गहराने और सूनेपन को और सघन भयावह बनाती बारिश कौ तेज़ आवाज़। अंधकार में डूबा शहर तथा अपने घरें में सोए - दुबके लोग ! लेकिन सचदेव बाबू की आँखों में नींद नहीं। अपने आलीशान भवन के भीतर अपने शयनकक्ष में बेहद आरामदायक बिस्तर पर लेटे थे वे। पर लेटने भर से ही तो नींद नहीं आती। नींद के लिए - जैसी निर्शिचितता और बेफिक्री की जरुरत होती है, वह तो उनसे कोसों दूर थी।

हालाँकि यह स्थिति सिर्फ सचदेव बाबू की ही नहीं थी। पूरे शहर का खौफ का यह कहर था। आए दिन चोरी, लूट, हत्या, बलात्कार, राहजनी और अपहरण की घटनाओं ने लोगों को बेतरह भयभीत और असुरक्षित बना दिया था। कभी रातों में गुलज़ार रहने वाला उनका 'यह शहर अब शाम गहराते ही शमशानी सन्ताटे में तब्दील होने लगा था। अब रातों में सड़कों और गलियों में नज़र आने वाले लोग शहर के सामान्य और संभ्रांत नागरिक नहीं, संदिग्ध लोग होते थे। कब 'किसके यहाँ कया हो जाए, सब आतंकित थे। जब इस शहर में अपना यह घर बनवा रहे थे सचदेव बाबू तो बहुत प्रसन्न थे कि महानगरों में दमघोंटू, विषाक्त, अजनबीयत और छल - छदमी वातावरण से अलग इस शांत-सहज और निश्छल - निर्दोष गँँबई शहर में बस रहे हैं। लेकिन अब तो महानगर की अजनबीयत की अपेक्षा यहाँ की भयावहता ने बुरी तरह से न्रस्त और परेशान कर दिया था उन्हें। ये 'बरसाती रातें तो उन्हें बरबादी और तबाही का साक्षात संकेत जान पड़ती थीं। इसे दुर्योग कहें या विडंबना कि जिस बात को लेकर आदमी आशंकित बना रहता है, कभी-कभी वह बात घट भी जाती है। इस अंधेरी, तूफानी, बरसाती रात में जिस बात को लेकर डर रहे थे सचदेव बाबू उसका आभास भी अब उन्हें होने लगा था। उन्हें लगा आगंतुक की आहट होने लगी । उनकी शंका सही थी। अब दरवाजे पर थपथपाहट की आवाज़ भी आने लगी थी । सचमुच कोई आ धमका था।

1. आकृति पूर्ण कीजिए:  (2)

  1. आरा शहर में घर बनवाते समय ये बहुत प्रसन्न थे।
  2. सचदेव बाबू की आँखों में इसका नाम नहीं था।
  3. बरसाती रातें बरबादी और तबाही का साक्षात यह थी-
  4. सचदेव बाबू को लगा आगंतुक की आहाट होने लगी-

2. निम्नलिखित शब्दों का वचन बदलकर लिखिए:    (2)

  1. आवाज - ______
  2. चोरी - ______
  3. शंका - ______
  4. सड़क - ______

3. चोरी, डकैती, राहजनी आदि की घटनाएँ इस विषय पर 40 से 50 शब्दों में अपना मत स्पष्ट कीजिए।  (2)

[20] अपठित विभाग
Chapter: [20] अपठित विभाग
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निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतिया कीजिए:

नानक गुरु न चेतनी मनि आपणे सुचेत। 
छूते तिल बुआड़ जिक सुएं अंदर खेत ॥ 
खेते अंदर छुट्टयां कहु नानक सऊ नाह।
'फली अहि फूली अहि बपुड़े भी तन बिच स्वाहं॥१॥
जलि मोह घसि मसि करि,
मति कागद करि सारु,
भाइ कलम करिं चितु, लेखारि,
गुरु पुछि लिखु बीचारि,
लिखु नाम सालाह लिखु,

1. संजाल पूर्ण कीजिए।  (2)

2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:   (2)

  1. मति 
  2. सुचेत
  3. लेखारि
  4. सऊ

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए:  (2)

'गुरु बिन ज्ञान न होइ' इस उक्ति पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।

[5] (अ) गुरुबानी (आ) वृंद के दोहे (पद्य)
Chapter: [5] (अ) गुरुबानी (आ) वृंद के दोहे (पद्य)
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निम्नलिखित पठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: 

सुनो सुगंधा ! तुम्हारा पत्र पाकर खुशी हुई। तुमने दोतरफा अधिकार की बात उठाई है, वह पसंद आई। बेशक, जहाँजिस बात से तुम्हारी असहमति हो; वहाँतुम्हें अपनी बात मुझे समझाने का पूरा अधिकार है। मुझे खुशी ही होगी तुम्हारे इस अधिकार प्रयोग पर। इससे राह खुलेगी और खुलती ही जाएगी । जहाँ कहीं कुछ रुकती दिखाई देगी; वहाँ भी परस्पर आदान-प्रदान से राह निकाल ली जाएगी। अपनी-अपनी बात कहने-सुनने में बंधन या संकोच कैसा?

मैंने तो अधिकार की बात यों पूछी थी कि मैं उस बेटी की माँ हूँ जो जीवन में ऊँचा उठने के लिए बड़े ऊँचे सपने देखा करती है; आकाश में अपने छोटे-छोटे डैनों को चौड़े फैलाकर।

धरती से बहुत ऊँचाई में फैले इन डैनों को यथार्थ से दूर समझकर भी मैं काटना नहीं चाहती। केवल उनकी डोर मजबूत करना चाहती हूँकि अपनी किसी ऊँची उड़ान में वे लड़खड़ा न जाएँ। इसलिए कहना चाहती हूँकि ‘उड़ो बेटी, उड़ो, पर धरती पर निगाह रखकर।’ कहीं ऐसा न हो कि धरती से जुड़ी डोर कट जाए और किसी अनजाने-अवांछित स्थल पर गिरकर डैने क्षत-विक्षत हो जाएँ। ऐसा नहीं होगा क्योंकि तुम एक समझदार लड़की हो। फिर भी सावधानी तो अपेक्षित है ही।

यह सावधानी का ही संकेत है कि निगाह धरती पर रखकर उड़ान भरी जाए। उस धरती पर जो तुम्हारा आधार है- उसमें तुम्हारे परिवेश का, तुम्हारे संस्कार का, तुम्हारी सांस्कृतिक परंपरा का, तुम्हारी सामर्थ्य का भी आधार जुड़ा होना चाहिए। हमें पुरानी-जर्जर रूढ़ियों को तोड़ना है, अच्छी परंपराओं को नहीं।

परंपरा और रूढ़ि का अर्थ समझती हो न तुम? नहीं ! तो इस अंतर को समझने के लिए अपने सांस्कृतिक आधार से संबंधित साहित्य अपने कॉलेज पुस्तकालय से खोजकर लाना, उसे जरूर पढ़ना। यह आधार एक भारतीय लड़की के नाते तुम्हारे व्यक्तित्व का अटूट हिस्सा है, इसलिए।

बदले वक्त के साथ बदलते समय के नये मूल्यों को भी पहचानकर हमें अपनाना है पर यहाँ ‘पहचान’ शब्द को रेखांकित करो। बिना समझे, बिना पहचाने कुछ भी नया अपनाने से लाभ के बजाय हानि उठानी पड़ सकती है।

1. निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लिखिए।  (2)

  1. लेखिका को खुशी कब हुई?
  2. हमें पुरानी रूढ़ियों को क्यों तोड़ना है?
  3. लेखिका किस बेटी की माँ है?
  4. लेखिका अपनी बेटी के ऊँचाई में फैलें डैनों कीं डोर मजबूत क्यों करना चाहती हैं?

2. शब्द युग्म को पूर्ण कीजिए:   (2)

  1. पुरानी
  2. क्षत
  3. कहने
  4. आदान

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए।  (2)

“पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण समाज के लिए हानिप्रद है” इस विषय पर अपना विचार स्पष्ट कीजिए।

[8] सुनो किशोरी
Chapter: [8] सुनो किशोरी
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निम्नलिखित पठित काव्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: 

जब भी पानी किसी के सर से गुजर जाएगा।
तब वह सीने में नई आग ही लगाएगा।

× ×   × ×

आँखों में बहुत बाढ़ है, शेष सब कुशल।
जीवन नहीं अषाढ़ है, फिर शेष सब कुशल ।

× ×   × ×

सड़क ने जब मेरे पैरों की उँगलियाँ देखीं;
कड़कती धूप में सीने पे बिजलियाँ देखीं।

× ×   × ×

साँस हमारी हमें पराये धन-सी लगती है,
साहुकार के घर गिरवी कंगन-सी लगती है।

× ×   × ×

किसी का सर खुला है तो किसी के पाँव बाहर हैं,
जरा ढंग से तू अपनी चादरों को बुन मेरे मालिक।

× ×   × ×

वह जो मजदूर मरा है, वह निरक्षर था मगर,
अपने भीतर वह रोज, इक किताब लिखता था।

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:   (2)

  1. पानी सर से गुजर जाने का अर्थ क्या है ?
  2. आँखों से आँसू बाढ़ की तरह क्यों बहते रहते हैं ?
  3. मजदूर रोज क्या लिखता था ?
  4. कवि को अपनी साँस कैसी लगती है?

2. निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलकर लिखिए:  (2)

  1. नदी - ______
  2. उँगलियाँ - ______
  3. किताब - ______
  4. आँखों - ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए।   (2)

'आकाश के तारे तोड़ लाना' - इस मुहावरे को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

[9] चुनिंदा शेर (पद्य)
Chapter: [9] चुनिंदा शेर (पद्य)
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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'पेड़ होने का अर्थ' कविता का रसास्वादन कीजिए।

मुददे-

  1. रचना का शीर्षक
  2. रचनाकार
  3. पसंद की पंक्तियाँ
  4. पसंद आने का कारण
  5. कविता की केन्द्रीय कल्पना
  6. प्रतीक विधान
[7] पेड़ होने का अर्थ (पद्य)
Chapter: [7] पेड़ होने का अर्थ (पद्य)
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कवि डॉक्टर जगदीश गुप्त की प्रमुख साहित्यिक कृतियों के नाम लिखिए।

[3] सच हम नहीं; सच तुम नहीं (पद्य)
Chapter: [3] सच हम नहीं; सच तुम नहीं (पद्य)
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निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

दुख क्यों करती है पगली
क्या हुआ जो
कनु के ये वर्तमान अपने,
तेरे उन तन्मय क्षणों की कथा से
अनभिज्ञ हैं
उदास क्यों होती है नासमझ
कि इस भीड़-भाड़ में
तू और तेरा प्यार नितांत अपरिचित

छूट गए है,
गर्व कर बावरी !
कौन है जिसके महान प्रिय की
अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ हों?

एक प्रश्न

अच्छा, मेरे महान कनु,
मान लो कि क्षण भर को
मैं यह स्वीकार लूँ
कि मेरे ये सारे तन्मयता के गहरे क्षण
सिर्फ भावावेश थे,
सुकोमल कल्पनाएँ थीं
रँगे हुए, अर्थहीन, आकर्षक शब्द थे-

मान लो कि
क्षण भर को
मैं यह स्वीकार लूँ
कि
पाप-पुण्य, धर्माधर्म, न्याय-दंड
क्षमा-शीलवाला यह तुम्हारा युद्ध सत्य है।

1. निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लिखिए:  (2)

  1. कनुप्रिया को गर्व क्यों करना चाहिए?
  2. कनुप्रिया को उदास क्यों नहीं होना चाहिए?
  3. कृति पूर्ण कीजिए।
    कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण सिर्फ ______।

2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए -  (2)

  1. तन्मयता - ______
  2. सुकोमल - ______
  3. नितांत - ______
  4. अनभिज्ञ - ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए:   (2)

प्राचीनकाल एवम्‌ आधुनिक काल कीं सेनाओं के बारे में अपना मत स्पष्ट कीजिए।

[13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
Chapter: [13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
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'मेरा यह सेतु-रूपी शरीर काँपता हुआ निर्जन और निरर्थक रह गया है।'- इसे 'कनुप्रिया' के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

[13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
Chapter: [13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
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निम्नलिखित पठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: 

मानव सहित विश्व के अधिकांश जीवों के जीवन में प्रकाश का बहुत महत्त्व है। विश्व में ऐसे बहुत-से जीव पाए जाते हैं, जिनके आँखें नहीं होतीं। इनके लिए प्रकाश का कोई महत्त्व नहीं हाेता। मोती बनाने वाला समुद्री घोंघा मुक्ताशुक्ति (Pearl Oyster) का सर्वोत्तम उदाहरण है।

इसी प्रकार विश्व में ऐसे बहुत-से जीव पाए जाते हैं, जो अपना रास्ता मालूम करने के लिए तथा इसी प्रकार के अन्य कार्य करने के लिए अपनी दृष्टि का उपयोग करते हैं। प्रकाश के अभाव में अपने कार्य करना बहुत कठिन हो जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए मानव टार्च, बल्ब एवं इसी प्रकार की अन्य कृत्रिम वस्तुओं का आविष्कार करता है। पशु-पक्षी इस प्रकार के कृत्रिम आविष्कार नहीं कर सकते। अत: प्रकृति ने उन्हें विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ प्रदान की हैं। उदाहरण के लिए उल्लू की आँखें बड़ी होती हैं, जिससे वह रात के अँधेरे में सरलता से देख सकता है। रात में शिकार करने वाले जीवों-बाघ, सिंह, तेंदुआ आदि की आँखों की संरचना इस प्रकार की होती है कि वे रात के अँधेरे में अपने शिकार की खोज कर सकते हैं। अर्थात पूर्ण अंधकार की स्थिति में विश्व का कोई भी जीव कुछ भी नहीं देख सकता।

विश्व में ऐसे भी अनेक जीव पाए जाते हैं, जिन्होंने अपने शरीर पर प्रकाश उत्पन्न करने वाले अंग विकसित कर लिए हैं तथा अपनी आवश्यकतानुसार इन अंगों से प्रकाश उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार के जीवों को प्रकाश उत्पन्न करने वाले (Bioluminiscent) जीव कहते हैं।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव अपने प्रकाश का उपयोग ठीक उसी प्रकार करते हैं, जिस प्रकार मानव टाॅर्च, बल्ब आदि का उपयोग करता है, किंतु मानव और प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों के प्रकाश में बहुत अंतर होता है। मानव द्वारा तैयार किए गए प्रकाश उत्पन्न करने वाले बल्ब जैसे उपकरणों में तंतु (Filament) को इतना गर्म करते हैं कि वह प्रकाश उत्पन्न करने लगता है। इस प्रकार के उपकरणों में प्रकाश के साथ ही ऊष्मा (Heat) भी उत्पन्न होती है। अत: इसे गर्म प्रकाश (Hot Light) कहा जा सकता है।

1. प्रश्न के उत्तर लिखिए।  (2)

  1. मुक्ता शुक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण बताइए।
  2. अपना कार्य करना कब कठिन हो जाता है?
  3. प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव अपने प्रकाश का उपयोग किस प्रकार से करते हैं?
  4. प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव किसके द्वारा प्रकाश उत्पन्न करते हैं?

2. निम्नलिखित प्रत्येक शब्द के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।  (2)

  1. प्रकाश - ______
  2. आविष्कार - ______
  3. ऊष्मा - ______
  4. शीतल - ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए।  (2)

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों की वैज्ञानिक अध्ययन की दृष्टि से जानकारी लिखिए।

[18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
Chapter: [18] व्यावहारिक हिंदी : प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
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'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत' इस पंक्ति का भाव पल्लवन कीजिए।

[14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
Chapter: [14] व्यावहारिक हिंदी : पल्लवन
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भगवान की सर्वश्रेष्ठ उपासना के रूप में इसे प्रतिष्ठित किया गया है:

[13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
Chapter: [13] विशेष अध्ययन : कनुप्रिया
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विषय का औचित्यपूर्ण ______ फीचर की आत्मा हैं।

[15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
Chapter: [15] व्यावहारिक हिंदी : फीचर लेखन
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ब्लॉग लेखन में सामाजिक स्वास्थ्य का विचार हो जो ______ न हों।

[17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
Chapter: [17] व्यावहारिक हिंदी : ब्लॉग लेखन
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पृथ्वी के ______ हिस्से पर समुद्रों की बिशाल जल राशि व्याप्त हैं।

[10] ओजोन विघटन का संकट
Chapter: [10] ओजोन विघटन का संकट
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निम्नलिखित अपठित परिच्छेद पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

“हम रसायनों के युग में रह रहे हैं। हमारे पर्यावरण कीं सारी वस्तुएँ और हम सब, रासायनिक यौगिकों के बने हुए हैं। हवा मिट्टी, पानी, खाना, वनस्पति और जीव-जंतु ये सब अजूबे जीवन कौ रासायनिक सच्चाई ने पैदा किए हैं। प्रकृति में सैकड़ों -हजारों रासायनिक पदार्थ हैं। रसायन न होते तो धरती पर जीवन भी नहीं होता। पानी, जो जीवन के आधार है, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना एक रासायनिक यौगिक है। मधुर-मीठी चीनी, कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनी है। कोयला और तेल, बीमारियों से मुक्ति दिलाने वाली औषधियाँ, एंटीबायोटिक्स, एस्प्रीन और पेनिसिलीन, अनाज साब्जियाँ फल और मेवे-सभी तो रसायन हैं।

जीवन जोखिम से भरा है, गुफामानव ने जब भी आग जलाई, उसने जल जाने का खतरा उठाया। जीवन-यापन के आधुनिक तरीकों के कुछ खतरों को कम किया है, पर कुछ खतरे अनेक गुना बढ़ गए हैं। ये खतरे नुकसान और शारीरिक चोट के रूप में हैं। हम सभी अपने दैनिक जीवन में जोखिम उठाते हैं। जैसे जब हम सड़क पार करते हैं, स्टोव जलातें हैं, कार में बैठते हैं, खेलते हैं, पालतू जानवरों को दुलारते हैं, घरेलू काम-काज करते हैं या केवल पेड़ के नीचे बैठे होते हैं, तो हम जोखिम उठा रहे होते हैं। इन जोखिमों में से कुछ तात्कालिक हैं, जैसे जलने का, गिरने का या अपने ऊपर कुछ गिर जाने का खतरा। कुछ खतरे ऐसे हैं जिनमें प्रभाव लंबे समय के बाद सामने आते हैं जैसे लंबे समय तक शोर-गुल वाले पर्यावरण में रहने वाले व्यक्तियों की श्रवणशक्ति कम हो सकती है।

क्या रसायन भी जोखिम उत्पन्न करते हैं ? स्पष्ट है कि कुछ अवश्य करते हैं। उनमें से अनेक बहुत अधिक जहरीले हैं, कुछ प्रचंड 'विस्फोट करते हैं और कुछ अन्य अचानक आग पकड़ लेते हैं, ये रसायनों के कुछ तात्कालिक 'उग्र' खतरे हैं। रसायनों में कुछ दीर्घकालीन खतरे भी होते हैं, क्योंकि कुछ रसायनों के संपर्क में अधिक समय तक रहने पर, चाहे उन रसायनों का स्तर लेशमात्र ही क्यों न हो, शरीर में बीमारियाँ पैदा हो सकती हैं।''

1. आकृति पूर्ण कीजिए:   (2)

2.  परिच्छेद में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए।  (2)

  1. जीव - ______
  2. सैकड़ों - ______
  3. काम - ______
  4. मधुर - ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए ।  (2)

'ध्वनि प्रदूषण' इस विषय पर अपने विचार लिखिए।

[20] अपठित विभाग
Chapter: [20] अपठित विभाग
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