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Science (Hindi Medium) Class 12 [कक्षा १२] - CBSE Question Bank Solutions for Physics (भौतिक विज्ञान)

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Physics (भौतिक विज्ञान)
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  1. किसी वेधशाला की विशाल दूरबीन के अभिदृश्यक की फोकस दूरी 15 m है। यदि 1.0 cm फोकस दूरी की नेत्रिका प्रयुक्त की गयी है तो दूरबीन का कोणीय आवर्धन क्या है?
  2. यदि इस दूरबीन का उपयोग चंद्रमा का अवलोकन करने में किया जाए तो अभिदृश्यक लेंस द्वारा निर्मित चंद्रमा के प्रतिबिंब का व्यास क्या है? चंद्रमा का व्यास 3.48 × 106 m तथा चंद्रमा की कक्षा की त्रिज्या 3.8 × 108 m है।
[9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Chapter: [9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
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किसी सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता उसकी फोकस दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है। तब हमें अधिकाधिक आवर्धन क्षमता प्राप्त करने के लिए कम-से-कम फोकस दूरी के उत्तल लेंस का उपयोग करने से कौन रोकता है?

[9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Chapter: [9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
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किसी संयुक्त सूक्ष्मदर्शी के अभिदृश्यक लेंस तथा नेत्रिका लेंस दोनों ही की फोकस दूरी कम क्यों होनी चाहिए?

[9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Chapter: [9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
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संयुक्त सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखते समय सर्वोत्तम दर्शन के लिए हमारे नेत्र, नेत्रिका पर स्थित न होकर उससे कुछ दूरी पर होने चाहिए। क्यों? नेत्र तथा नेत्रिका के बीच की यह अल्प दूरी कितनी होनी चाहिए?

[9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Chapter: [9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
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1.25 cm फोकस दूरी का अभिदृश्यक तथा 5 cm फोकस दूरी की नेत्रिका का उपयोग करके वांछित कोणीय आवर्धन (आवर्धन क्षमता) 30X होता है। आप संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का समायोजन कैसे करेंगे?

[9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Chapter: [9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
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किरण प्रकाशिकी, प्रकाश के सीधी रेखा में गति करने की संकल्पना पर आधारित है। यद्यपि विवर्तन प्रभाव (जब प्रकाश का संचरण एक द्वारक/झिरी या वस्तु के चारों ओर प्रेक्षित किया जाए) इस संकल्पना को नकारता है तथापि किरण प्रकाशिकी की संकल्पना प्रकाशकीय यन्त्रों में प्रतिबिम्बों की स्थिति तथा उनके दूसरे अनेक गुणों को समझने के लिए सामान्यतः उपयोग में लाई जाती है। इसका क्या औचित्य है?

[10] तरंग-प्रकाशिकी
Chapter: [10] तरंग-प्रकाशिकी
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किसी 1000 MW विखण्डन रिएक्टर के आधे ईधन का 5.00 वर्ष में व्यय हो जाता है। प्रारम्भ में इसमें कितना \[\ce{_{92}^{235}{U}}\] था? मान लीजिए कि रिएक्टर 80% समय कार्यरत रहता है, इसकी सम्पूर्ण ऊर्जा \[\ce{_{92}^{235}{U}}\] के विखण्डन से ही उत्पन्न हुई है; तथा \[\ce{_{92}^{235}{U}}\] एन्यूक्लाइड केवल विखण्डन प्रक्रिया में ही व्यय होता है।

[13] नाभिक
Chapter: [13] नाभिक
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मान लीजिए कि भारत का लक्ष्य 2020 तक 200,000 MW विद्युत शक्ति जनन का है। इसका 10% नाभिकीय शक्ति संयंत्रों से प्राप्त होना है। माना कि रिएक्टर की औसत उपयोग दक्षता (ऊष्मा को विद्युत में परिवर्तित करने की क्षमता) 25% है। 2028 के अन्त तक हमारे देश को प्रति वर्ष कितने विखण्डनीय यूरेनियम की आवश्यकता होगी। \[\ce{^{235}{U}}\] प्रति विखण्डन उत्सर्जित ऊर्जा 200 MeV है।

[13] नाभिक
Chapter: [13] नाभिक
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4 × 10-9 C m द्विध्रुव आघूर्ण को कोई विद्युत-द्विध्रुव 5 × 104 NC-1 परिमाण के किसी एकसमान विद्युत-क्षेत्र की दिशा से 30° पर संरेखित है। द्विध्रुव पर कार्यरत बल आघूर्ण का परिमाण परिकलित कीजिए।

[1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
Chapter: [1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
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किसी चालक A, जिसमें निचे दिए गए चित्र में दर्शाए अनुसार कोई कोटर/गुहा (Cavity) है, को Q आवेश दिया गया है। यह दर्शाइए कि समस्त आवेश चालक के बाह्य पृष्ठ पर प्रतीत होना चाहिए।

[1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
Chapter: [1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
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निचे दिए गए चित्र में  कोई अन्य चालक B जिस पर आवेश q है, को कोटर/गुहा (Cavity) में इस प्रकार सँसा दिया जाता है कि चालक Bचालक A से विद्युतरोधी रहे। यह दर्शाइए कि चालक A के बाह्य पृष्ठ पर कुल आवेश Q + q है। 

[1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
Chapter: [1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
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किसी सुग्राही उपकरण को उसके पर्यावरण के प्रबल स्थिर विद्युत-क्षेत्रों से परिरक्षित किया जाना है। सम्भावित उपाय लिखिए।

[1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
Chapter: [1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
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किसी खोखले आवेशित चालक में उसके पृष्ठ पर कोई छिद्र बनाया गया है। यह दर्शाइए कि छिद्र में विद्युत-क्षेत्र (σ/2ε0) `hat"n"` है, जहाँ  `hat"n"` अभिलम्बवत् दिशा में बहिर्मुखी एकांक सदिश है तथा σ छिद्र के निकट पृष्ठीय आवेश घनत्व है।

[1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
Chapter: [1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
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9 pF धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है।

  1. संयोजन की कुल धारिता क्या है?
  2. यदि संयोजन को 120 V के संभरण (सप्लाई) से जोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक संधारित्र पर क्या विभवांतर होगा?
[2] स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
Chapter: [2] स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
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2 pF, 3 pF और 4 pF धारिता वाले तीन संधारित्र पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं। संयोजन की कुल धारिता क्या है?

[2] स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
Chapter: [2] स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
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2 pF, 3 pF और 4 pF धारिता वाले तीन संधारित्र पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं। यदि संयोजन को 100 V के संभरण से जोड़ दें तो प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए।

[2] स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
Chapter: [2] स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
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  1. 2 Ω, 4 Ω और 5 Ω के तीन प्रतिरोधक पार्श्व में संयोजित हैं। संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या होगा ?
  2. यदि संयोजन को 20 V के विद्युत वाहक बल की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है, से सम्बद्ध किया जाता है तो प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा तथा बैटरी से ली गई कुल धारा का मान ज्ञात कीजिए।
[3] विद्युत धारा
Chapter: [3] विद्युत धारा
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छह लेड एसिड संचायक सेलों, जिनमें प्रत्येक का विद्युत वाहक बल 2V तथा आन्तरिक प्रतिरोध 0.015 Ω है, के संयोजन से एक बैटरी बनाई जाती है। इस बैटरी का उपयोग 8.5 Ω प्रतिरोधक जो इसके साथ श्रेणी सम्बद्ध है, में धारा की आपूर्ति के लिए किया जाता है। बैटरी से कितनी धारा ली गई है एवं इसकी टर्मिनल वोल्टता क्या है?

[3] विद्युत धारा
Chapter: [3] विद्युत धारा
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एक लम्बे समय तक उपयोग में लाए गए संचायक सेल का विद्युत वाहक बल 1.9 V और विशाल आन्तरिक प्रतिरोध 380 Ω है। सेल से कितनी अधिकतम धारा ली जा सकती है? क्या सेल से प्राप्त यह धारा किसी कार की प्रवर्तक-मोटर को स्टार्ट करने में सक्षम होगी?

[3] विद्युत धारा
Chapter: [3] विद्युत धारा
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किसी उच्च विभव (H.T.) संभरण, मान लीजिए 6 kV को आन्तरिक प्रतिरोध अत्यधिक होना चाहिए, क्यों?

[3] विद्युत धारा
Chapter: [3] विद्युत धारा
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