English

English Medium Class 10 - CBSE Question Bank Solutions

Advertisements
[object Object]
[object Object]
Subjects
Popular subjects
Topics

Please select a subject first

Advertisements
Advertisements
< prev  2961 to 2980 of 12982  next > 

इस आत्मकथ्य में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया है। रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएँ -

पत्र पढ़ते ही पिता जी आग-बबूला हो गए।

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

"अर्थ बिना कब पूर्ण हैं, शब्द, सकल जग-काज।

अर्थ अगर आ जाए तो, ठाठ-बाट औ राज।।" 

इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है-

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

Advertisements

"कैसे कलुषित प्राण हो गए।

मानो मन पाषाण हो गए।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

"इधर उठाया धनुष क्रोध में और चढ़ाया उस पर बाण।

धरा, सिंधु, नभ कॉँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

"एक दिवस सूरज ने सोची, छुट्टी ले लेने की बात।

सोचा कुछ पल सुकूँ मिलेगा, चलने दो धरती पर रात।।” 

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।

हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।” 

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

“सो जनु हमरेहि माथें काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।” इस चौपाई में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

“जिसके अरुण - कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

“पल-पल परिवर्तित प्रकृति वेश।” इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”

इस दोहे में निहित अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

'जो रहीम गति दीप की कुल कपूत की सोय।
बारै उजियारों करै, बढ़ै अँधेरो होय।'

इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

'सोहत ओढ़े पीत-पट स्याम सलौने गात।
मनो नीलमणि सेल पर आतप परयो प्रभात॥'

इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

'उषा सुनहले तीर बरसती
जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।'

इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

'हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।'

इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

'देखि सुदामा की दीन-दशा करुणा करके करुणानिधि रोए,
पानी परात कौ हाथ छुऔ नहिं नैनन के जल सौं पग धोए।'

इस काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

'जा तन की झाँई परै श्याम हरित दुति होय।' - इस काव्य-पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

निम्नलिखित में अलंकार है - 'मेघ आए बन-ठन के सँवर के।'

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

“प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै।” इस काव्य-पंक्ति में अलंकार है -

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined

निम्नलिखित में अलंकार है - 'मनहूँ रंक निधि लूटन लागी।'

[3] व्याकरण विभाग
Chapter: [3] व्याकरण विभाग
Concept: undefined >> undefined
< prev  2961 to 2980 of 12982  next > 
Advertisements
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×