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SSC (Marathi Semi-English) 10th Standard Board Exam [इयत्ता १० वी] - Maharashtra State Board Important Questions

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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए:

मुद्दे भारत महिमा
(1) रचनाकार का नाम  
(2) रचना की विधा  
(3) पसंद की पंक्तियाँ  
(4) पंक्तियाँ पसंद होने का कारण  
(5) रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा  
Appears in 1 question paper
Chapter: [1] भारत महिमा
Concept: भारत महिमा

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

किसी का हमने छीना नहीं, प्रकृति का रहा पालना यहीं
हमारी जन्मभूमि थी यहीं, कहीं से हम आए थे नहीं।
चरित थे पूत, भुजा में शक्‍ति, नम्रता रही सदा संपन्न
हृदय के गौरव में था गर्व, किसी को देख न सके विपन्न।
हमारे संचय में था दान, अतिथि थे सदा हमारे देव
वचन में सत्‍य, हृदय में तेज, प्रतिज्ञा में रहती थी टेव।
वही है रक्‍त, वही है देश, वही साहस है, वैसा ज्ञान
वही है शांति, वही है शक्‍ति, वही हम दिव्य आर्य संतान।
जिएँ तो सदा इसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष
निछावर कर दें हम सर्वस्‍व, हमारा प्यारा भारतवर्ष।

  1. उत्तर लिखिए:          [2]
    वचन में संचय में भुजा में प्रतिज्ञा में
    ______ ______ ______ ______
    1. पद्यांश से विलोम शब्द की जोड़ी ढूढकर लिखिए:        [1]
      ______ x ______
    2. निम्नलिखित शब्दों के वचन पहचानकर लिखिए:       [1]
      1. भारत - ______
      2. भुजाएँ - ______
  2. उपर्युक्त पद्यांश अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।      [2]
Appears in 1 question paper
Chapter: [1] भारत महिमा
Concept: भारत महिमा

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

दूसरे दिन रहमान सवेरे आठ-नौ बजे के करीब लक्ष्मी को इलाके से बाहर जहाँ नाला बहता हैं, जहाँ झाड़-झंखाड़ और कहीं दूब के कारण जमीन हरी नजर आती है, छोड़ आया ताकि वह घास इत्यादि खाकर अपना कुछ पेट भर ले। लेकिन माँ-बेटे को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि लक्ष्मी एक-डेढ़ घंटे बाद ही घर के सामने खड़ी थी। उसके गले में रस्सी थी । एक व्यक्ति उसी रस्सी को हाथ में थामे कह रहा था- “यहगाय क्या आप लोगों की है?”

रमजानी ने कहा, “हाँ।”

“यह हमारी गाय का सब चारा खा गई है। इसे आप लोग बॉँधकर रखें नहीं तो काँजी हाउस में पहुँचा देंगे।”

रमजानी चुप खड़ी आगंतुक की बातें सुनती रही।

दोपहर बाद जब करामत अली ड्यूटी से लौटा और नहा-धोकर कुछ नाश्ते के लिए बैठा तो रमजानी उससे बोली- “मेरी मानो तो इसे बेच दो!”

“फिर बेचने की बात करती हो...? कौन खरीदेगा इस बुढ़िया को।”

(1) संजाल पूर्ण कीजिए। (2)

(2) केवल एक/दो शब्दों में उत्तर लिखिए: (2)

  1. करामत अली इस समय ड्यूटी से लौटा ______
  2. दूसरों की गाय का चारा खानेवाली ______
  3. रमजानी इसकी बातें सुनती रही ______
  4. लक्ष्मी को देखकर आश्चर्यचकित होने वाले ______

(3) (i) वचन परिवर्तन कीजिए: (1)

  1. इलाके -
  2. रस्सी -

(ii) लिंग परिवर्तन कीजिए: (1)

  1. बेटा -
  2. गाय -

(4) ‘जानवरों के प्रति हमदर्दी’ विषय पर अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [2] लक्ष्मी
Concept: लक्ष्मी

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

नागर जी: लिखने से पहले तो मैंने पढ़ना शुरू किया था। आरंभ में कवियों को ही अधिक पढ़ता था। सनेही जी, अयोध्यासिंह उपाध्याय की कविताएँ ज्यादा पढ़ीं। छापे का अक्षर मेरा पहला मित्र था। घर में दो पत्रिकाएँ मँगाते थे मेरे पितामह। एक 'सरस्वती' और दूसरी 'गृहलक्ष्मी'। उस समय हमारे सामने प्रेमचंद का साहित्य था, कौशिक का था। आरंभ में बंकिम के उपन्यास पढ़े। शरतचंद्र को बाद में। प्रभातकुमार मुखोपाध्याय का कहानी संग्रह 'देशी और विलायती' १९३० के आसपास पढ़ा। उपन्यासों में बंकिम के उपन्यास १९३० में ही पढ़ डाले। 'आनंदमठ', 'देवी चौधरानी' और एक राजस्थानी थीम पर लिखा हुआ उपन्यास, उसी समय पढ़ा था।
तिवारी जी: क्या यही लेखक आपके लेखन के आदर्श रहे?
नागर जी: नहीं, कोई आदर्श नहीं। केवल आनंद था पढ़ने का। सबसे पहले कविता फूटी साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय १९२८-१९२९ में। लाठीचार्ज हुआ था। इस अनुभव से ही पहली कविता फूटी- 'कब लाैं कहाैं लाठी खाय!' इसे ही लेखन का आरंभ मानिए।

1. नाम लिखिए: (2)


1. ______ 1. ______
2. ______ 2. ______

2. लिखिए: (2)

  1. लेखक का पहला मित्र – ______
  2. लेखक की पहली कविता – ______

3. गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: (2)

  1. प्रत्यययुक्त शब्द:
    i. ______
    ii. ______
  2. ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन नहीं होता:
  1. ______
  2. ______

4. 'पढ़ोगे तो बढ़ोगे' विषय पर २५ ते ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [2.09] जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
Concept: जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

दर्द के मारे एक तो मरीज को वैसे ही नींद नहीं आती, यदि थोड़ी-बहुत आ भी जाए तो मिलने वाले जगा देते हैं- खास कर वे लोग जो सिर्फ औपचारिकता निभाने आते हैं। इन्हें मरीज से हमदर्दी नहीं होती, ये सिर्फ सूरत दिखाने जाते हैं। ऐसे में एक दिन मैंने तय किया कि आज कोई भी आए, मैं आँख नहीं खोलूँगा। चुपचाप पड़ा रहूँगा। ऑफिस के बड़े बाबू आए और मुझे सोया जानकर वापस जाने के बजाय वे सोचने लगे कि यदि मैंने उन्हें नहीं देखा तो कैसे पता चलेगा कि वे मिलने आए थे। अत: उन्होंने मुझे धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया। फिर भी जब आँखें नहीं खुलीं तो उन्होंने मेरी टाँग के टूटे हिस्से को जोर से दबाया। मैंने दर्द के मारे कुछ चीखते हुए जब आँख खोली तो वे मुस्कराते हुए बोले- “कहिए, अब दर्द कैसा है?” मुहल्लेवाले अपनी फुरसत से आते हैं। उस दिन जब सोनाबाई अपने चार बच्चों के साथ आई तो मुझे लगा कि आज फिर कोई दुर्घटना होगी। आते ही उन्होंने मेरी ओर इशारा करते हुए बच्चों से कहा- “ये देखो चाचा जी !” उनका अंदाज कुछ ऐसा था जैसे चिड़ियाघर दिखाते हुए बच्चों से कहा जाता है- “ये देखो बंदर।”

(1) लिखिए: (2)

औपचारिकता निभाने वालों की विशेषताएँ:

  1. ______
  2. ______

(2) आकृति में लिखिए: (2)

(3) (1) गद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए: (1)

  1. ______
  2. ______

(2) लिखिए: (1)

(4) ‘मरीज से मिलने जाते समय कौन-कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए’, इस विषय पर अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [3] वाह रे ! हमदर्द
Concept: वाह रे ! हमदर्द

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

टाँग से ज्यादा फिक्र मुझे उन लोगों की हुई जो हमदर्दी जताने मुझसे मिलने आएँगे। ये मिलने-जुलने वाले कई बार इतने अधिक आते हैं और कभी-कभी इतना परेशान करते हैं कि मरीज का आराम हराम हो जाता है, जिसकी मरीज को खास जरूरत होती है। जनरल वार्ड का तो एक नियम होता है कि आप मरीज को एक निश्चित समय पर आकर ही तकलीफ दे सकते हैं किंतु प्राइवेट वार्ड, यह तो एक खुला निमंत्रण है कि ‘‘हे मेर परिचितो, रिश्तेदारो, मित्रो ! आओ, जब जी चाहे आओ, चाहे जितनी देर रुको, समय का कोई बंधन नहीं। अपने सारे बदले लेने का यही वक्त है।’’ बदले का बदला और हमदर्दी की हमदर्दी। मिलने वालों का खयाल आते ही मुझे लगा मेरी दूसरी टाँग भी टूट गई।

मुझसे मिलने के लिए सबसे पहले वे लोग आए जिनकी टाँग या कुछ और टूटने पर मैं कभी उनसे मिलने गया था, मानो वे इसी दिन का इंतजार कर रहे थे कि कब मेरी टाँग टूटे और कब वे अपना एहसान चुकाएँ। इनकी हमदर्दी में यह बात खास छिपी रहती है कि देख बेटा, वक्त सब पर आता है।

दर्द के मारे एक तो मरीज को वैसे ही नींद नहीं आती, यदि थोड़ी-बहुत आ भी जाए तो मिलने वाले जगा देते हैं- खास कर वे लोग जो सिर्फ औपचारिकता निभाने आते हैं।

(1) निम्नलिखित वाक्य पूर्ण कीजिए:    [2]

  1. मरीज का आराम हराम तब हो जाता है जब ______
  2. जब मिलने वालों का खयाल लेखक को आता है तब ______

(2) उत्तर लिखिए:      [2]

  1. हमदर्दी जताने वालों की फिक्र करने वाला -
  2. लेखक को परेशान करने वाले -
  3. मरीज को मिलने के संबंध में यहाँ समय का बंधन पाला जाता है -
  4. मरीज को इसके कारण नींद नहीं आती -

(3)

  1. गद्यांश में आई हुई एक समानार्थी शब्द की जोड़ी दूँढकर लिखिए।    [1]
  2. गद्यांश में प्रयुक्त दो उर्दू शब्द ढँढकर लिखिए:      [1]
    1. ___________
    2. ___________

(4) 'आराम हराम है' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।     [2]

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Chapter: [3] वाह रे ! हमदर्द
Concept: वाह रे ! हमदर्द

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

घना अँधेरा
चमकता प्रकाश
और अधिक।

करते जाओ
पाने की मत सोचो
जीवन सारा।

जीवन नैया
मँझधार में डोले
सँभाले कौन?

रंग-बिरंगे
रंग-संग लेकर
आया फागुन।

(1) ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्न शब्द हों: (2)

  1. जीवन नैया -
  2. फागुन -

(2) ‘जीवन एक संघर्ष है’ इस पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

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Chapter: [4] मन (पूरक पठन)
Concept: मन

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सितारे छिपे
बादलों की ओट में
सूना आकाश।

तुमने दिए
जिन गीतों को स्‍वर
हुए अमर।

सागर में भी
रहकर मछली
प्यासी ही रही।

(1) तालिका पूर्ण कीजिए: (2)

  स्थिति निवास स्थान
मछली ______ ______
सितारे ______ ______

(2) ‘रात में सितारे आकाश की शोभा बढ़ाते हैं’ अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [4] मन (पूरक पठन)
Concept: मन

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

मन की पीड़ा
छाई बन बादल
बरसीं आँखें।

चलतीं साथ
पटरियाँ रेल की
फिर भी मौन।

सितारे छिपे
बादलों की ओट में
सूना आकाश।

(1) उत्तर लिखिए: (2)

  1. मौन बनी - ______
  2. छिपे हुए - ______
  3. बरसीं हुईं - ______
  4. सूना - ______

(2) ‘मन के जीते जीत है’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [4] मन (पूरक पठन)
Concept: मन

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

काँटो के बीच
खिलखिलाता फूल
देता प्रेणा।

भीतरी कुंठा
आँखों के द्‌वार से
आई बाहर।

खारे जल से
धुल गए विषाद
मन पावन ।

  1. उचित जोड़ियाँ मिलाइए :         [2]
      'अ' 'आ'
    (i) खिलखिलाता फूल विषाद
    (ii) भीतरी जल
    (iii) खारा प्रेरणा
    (iv) पावन कुंठा
        मन
  2. काँटों के बीच खिलनेवाला फूल प्रेरणा देता है' विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।         [2]
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Chapter: [4] मन (पूरक पठन)
Concept: मन

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

      कुछ देर बाद हमारी टैक्सी मडगाँव से पाँच किमी दूर दक्षिण में स्थित कस्बा बेनालियम के एक रिसोर्ट में आकर रुक गई। यह रिसोर्ट हमने पहले से बुक कर लिया था। इसलिए औपचारिक खानापूर्ति कर हम आराम करने के इरादे से अपने-अपने स्यूट में चले गए। इससे पहले कि हम कमरों से बाहर निकलें, मैं आपको गोवा की कुछ खास बातें बता दूँ। दरअसल, गोवा राज्य दो भागों में बँटा हुआ है। दक्षिण गोवा जिला तथा उत्तर गोवा जिला। इसकी राजधानी पणजी मांडवी नदी के किनारे स्थित है। यह नदी काफी बड़ी है तथा वर्ष भर पानी से भरी रहती है। फिर भी समुद्री इलाका होने के कारण यहाँ मौसम में प्राय: उमस तथा हवा में नमी बनी रहती है। शरीर चिपचिपाता रहता है लेकिन मुंबई जितना नहीं, क्योंकि यहाँ का क्षेत्र हरीतिमा से भरपूर है फिर भी धूप तो तीखी ही होती है।
       यों तो गोवा अपने खूबसूरत सफेद रेतीले तटों, महँगे होटलों तथा खास जीवनशैली के लिए जाना जाता है लेकिन इन सबके बावजूद यह अपने में एक सांस्कृतिक विरासत भी समेटे हुए है।

1. आकृति पूर्ण कीजिए: (2)

2. उत्तर लिखिए: (2)

गद्यांश में उल्लेखित नदी की विशेषताएँ

  1. ______
  2. ______

3. 

i. निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में प्रयुक्त विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)

  1. अनौपचारिक - ______
  2. छाँव - ______

ii. गद्यांश से अंग्रजी शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)

  1. ______
  2. ______

4. 'पर्यटन ज्ञान वृद्धि का साधन' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [5] गोवा : जैसा मैंने देखा
Concept: गोवा : जैसा मैंने देखा

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

सबसे पहले हम अंजुना बीच पहुँचे। गोवा में छोटे-बड़े करीब 40 बीच हैं लेकिन प्रमुख सात या आठ ही हैं। अंजुना बीच नीले पानीवाला, पथरीला बहुत ही खूबसूरत है। इसके एक ओर लंबी-सी पहाड़ी है, जहाँ से बीच का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। समुद्र तक जाने के लिए थोड़ा नीचे उतरना पड़ता है। नीला पानी काले पत्‍थरों पर पछाड़ खाता रहता है। पानी ने काट-काटकर इन पत्‍थरों में कई छेद कर दिए हैं जिससे ये पत्‍थर कमजोर भी हो गए हैं। साथ ही समुद्र के काफी पीछे हट जाने से कई पत्‍थरों के बीच में पानी भर गया है। इससे वहाँ काई ने अपना घर बना लिया है। फिसलने का डर हमेशा लगा रहता है लेकिन संघर्षों में ही जीवन है, इसलिए यहाँ घूमने का भी अपना अलग आनंद है। यहाँ युवाओं का दल तो अपनी मस्‍ती में डूबा रहता है, लेकिन परिवार के साथ आए पर्यटकों का ध्यान अपने बच्चों को खतरों से सावधान रहने के दिशानिर्देश देने में ही लगा रहता है। मैंने देखा कि समुद्र किनारा होते हुए भी बेनालियम बीच तथा अंजुना बीच का अपना-अपना सौंदर्य है। बेनालियम बीच रेतीला तथा उथला है। यह मछुआरों की पहली पसंद है।

(1) विशेषताएँ लिखिए: (2)

(i) 

(ii)

(2) एक/दो शब्दों में उत्तर लिखिए: (2)

  1. गोवा के छोटे-बड़े बीच की संख्या - ______
  2. काई ने यहाँ घर बना लिया था - ______
  3. अपने बच्चों को खतरों से सावधान कराने वाले - ______
  4. बेनालियम बीच इनकी पहली पसंद है - ______

(3) (i) निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द गद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: (1)

  1. बदसूरत × ______
  2. नापसंद × ______

(ii) निम्नलिखित शब्दों के लिए पर्यायवाची शब्द लिखिए: (1)

  1. कमजोर - ______
  2. आनंद - ______

(4) अपने द्वारा किए हुए पर्यटन का एक अनुभव 25 से 30 शब्दों में लिखिए: (2)

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Chapter: [5] गोवा : जैसा मैंने देखा
Concept: गोवा : जैसा मैंने देखा

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

         जिस गली में आजकल रहता हूँ – वहाँ एक आसमान भी है लेकिन दिखाई नहीं देता। उस गली में पेड़ भी नहीं हैं, न ही पेड़ लगाने की गुंजाइश ही है। मकान ही मकान हैं। इतने मकान कि लगता है मकान पर मकान लदे हैं। लंद-फंद मकानों की एक बहुत बड़ी भीड़, जो एक सँकरी गली में फँस गई और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। जिस मकान में रहता हूँ, उसके बाहर झाँकने से 'बाहर' नहीं सिर्फ दूसरे मकान और एक गंदी व तंग गली दिखाई देती है। चिड़ियाँ दिखती हैं, लेकिन पेड़ों पर बैठीं या आसमान में उड़तीं हुई नहीं। बिजली या टेलीफोन के तारों पर बैठी, मगर बातचीत करतीं या घरों के अंदर यहाँ-वहाँ घोंसले बनाती नहीं दिखतीं।

1. लिखिए: (2)

गद्यांश में उल्लेखित चिड़ियों की विशेषताएँ –

  1. ____________
  2. ____________

2. 'पक्षियों की घटती संख्या' विषय पर २५ से ३० शब्दों में अपने विचार लिखिए। (2)

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Chapter: [7] खुला आकाश (पूरक पठन)
Concept: खुला आकाश

निम्नलिखित पठित पद्यांश दी गई पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

एक जुगनू ने कहा मैं भी तुम्हारे साथ हूँ,
वक्त की इस धुंध में तुम रोशनी बनकर दिखो।
एक मर्यादा बनी है हम सभी के वास्ते,
गर तुम्हें बनना है मोती सीप के अंदर दिखो।
डर जाए फूल बनने से कोई नाजुक कली,
तुम ना खिलते फूल पर तितली के टूटे पर दिखो।
कोई ऐसी शक्ल तो मुझको दिखे इस भीड़ में,
मैं जिसे देखूँ उसी में तुम मुझे अक्सर दिखो।

1. पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए: (2)

  1. जुगनू - धुंध
  2. रोशनी - तितली
            मैं
  1. ______
  2. ______

2. 

i. निम्नलिखित के लिए पद्यांश से शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)

  1. लोगों का समूह - ______
  2. सीप में बनने वाला रत्न् - ______

ii. पद्यांश में आए 'पर' शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए: (1)

  1. ______
  2. ______

3. अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ २५ से ३० शब्दों में लिखिए: (2)

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Chapter: [8] गजल
Concept: गजल

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

आपसे किसने कहा स्‍वर्णिम शिखर बनकर दिखो,
शौक दिखने का है तो फिर नींव के अंदर दिखाे।

चल पड़ी तो गर्द बनकर आसमानों पर लिखो,
और अगर बैठो कहीं ताे मील का पत्‍थर दिखाे।

सिर्फ देखने के लिए दिखना कोई दिखना नहीं,
आदमी हो तुम अगर तो आदमी बनकर दिखाे।

जिंदगी की शक्‍ल जिसमें टूटकर बिखरे नहीं,
पत्‍थरों के शहर में वो आईना बनकर दिखो। 

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए: (2)

‘अ’ ‘आ’
(i) शिखर गर्द
(ii) आसमान जिंदगी
(iii) पत्थर स्वर्णिम
(iv) शक्ल मील
  नींव

(2) उत्तर लिखिए: (2)

(i) मनुष्य को ये बनकर दिखाना है:

  1. ______
  2. ______

(ii) कवि दिखने के लिए कहते हैं:

  1. ______
  2. ______

(3) प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। (2)

Appears in 1 question paper
Chapter: [8] गजल
Concept: गजल

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

हाथ में संतोष की तलवार ले जो उड़ रहा है,
जगत में मधुमास, उसपर सदा पतझर रहा है,
दीनता अभिमान जिसका, आज उसपर मान कर लूँ।
उस कृषक का गान कर लूँ।।

चूसकर श्रम रक्‍त जिसका, जगत में मधुरस बनाया,
एक-सी जिसको बनाई, सृजक ने भी धूप-छाया,
मनुजता के ध्वज तले, आह्‌वान उसका आज कर लूँ।
उस कृषक का गान कर लूँ।।

(1) आकृति में लिखिए: (2)

(i)

(ii)

(2) (i) उपर्युक्त पद्यांश से ‘ता’ प्रत्यययुक्त दो शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)

  1. ______
  2. ______

(ii) पद्यांश में आए दो संस्कृत शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (1)

  1. ______
  2. ______

(3) उपर्युक्त पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)

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Chapter: [11] कृषक का गान
Concept: कृषक का गान

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा।।

दामिनि दमक रहहिं घन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं।।

बरषहिं जलद भूमि निअराएँ। जथा नवहिं बुध विद्या पाएँ।।

बूँद अघात सहहिं गिरि कैसे। खल के बचन संत सह जैसे।।

छुद्र नदी भरि चली तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई।।

भूमि परत भा ढाबर पानी। जनु जीवहिं माया लपटानी।।

समिटि-समिटि जल भरहिं तलावा। जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा।।

सरिता जल जलनिधि महुँ जाईं। होई अचल जिमि जिव हरि पाई।।

(1) लिखिए:        (2)

पद्यांश में आए जल स्रोत- 

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______

(2) निम्न शब्दों के लिए पद्यांश में प्रयुक्त समानार्थी शब्द लिखिए:     (2)

  1. गगन -
  2. पर्वत -
  3. बिजली -
  4. दुष्ट -

(3) उपर्युक्त पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।        (2)

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Chapter: [12] बरषहिं जलद
Concept: बरषहिं जलद

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

दादुर धुनि चहुँ दिसा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई।।

नव पल्‍लव भए बिटप अनेका। साधक मन जस मिले बिबेका।।

अर्क-जवास पात बिनु भयउ। जस सुराज खल उद्यम गयऊ।।

खोजत कतहुँ मिलइ नहिं धूरी। करइ क्रोध जिमि धरमहिं दूरी।।

ससि संपन्न सोह महि कैसी। उपकारी कै संपति जैसी।।

निसि तम घन खद्योत बिराजा। जनु दंभिन्ह कर मिला समाजा।।

कृषी निरावहिं चतुर किसाना। जिमि बुध तजहिं मोह-मद-माना।।

देखिअत चक्रबाक खग नाहीं। कलिहिं पाइ जिमि धर्म पराहीं।।

विविध जंतु संकुल महि भ्राजा। प्रजा बाढ़ जिमि पाई सुराजा।।

जहँ-तहँ रहे पथिक थकि नाना। जिमि इंद्रिय गन उपजे ग्‍याना।।

(1) परिणाम लिखिए: (2)

  1. कलियुग आने से ______
  2. सुराज होने से ______
  3. बरसात के आने से ______
  4. क्रोध के आने से ______

(2) पद्यांश में ढूँढ़कर लिखिए: (2)

(i) ऐसे दो शब्द जिनका वचन परिवर्तन से रूप नहीं बदलता: (1)

  1. ______
  2. ______

(ii) ऐसे शब्द जिनका अर्थ निम्न शब्द हों: (1)

  1. मेंढक = ______
  2. वृक्ष = ______

(3) उपर्युक्त पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए। (2)

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Chapter: [12] बरषहिं जलद
Concept: बरषहिं जलद

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

घन घमंड नभ गरजत घोरा। प्रिया हीन डरपत मन मोरा।।
दामिनि दमक रहहिं घन माहीं। खल कै प्रीति जथा थिर नाहीं।।
बरषहिं जलद भूमि निअराएँ। जथा नवहिं बुध विद्या पाएँ।।
बूँद अघात सहहिं गिरि कैसे। खल के बचन संत सह जैसे।।
छुद्र नदी भरि चली तोराई। जस थोरेहुँ धन खल इतराई।।
भूमि परत भा ढाबर पानी। जनु जीवहिं माया लपटानी।।
समिटि-समिटि जल भरहिं तलावा। जिमि सदगुन सज्‍जन पहिं आवा।।
सरिता जल जलनिधि महुँ जाई। होई अचल जिमि जिव हरि पाई।।
  1. निम्नलिखित विधान सत्य अथवा असत्य पहचानकर लिखिए :     [2]
    1. उपर्युक्त पद्यांश में शिशिर ऋतु का वर्णन किया है → ______
    2. श्री राम जी का मन डर रहा है → ______
    3. दुष्ट व्यक्ति का प्रेम स्थिर नहीं होता है → ______
    4. सदगुण एक-एक करके अपने आप सज्जन व्यक्ति के पास आ जात हैं → ______
    1. निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश में प्रयुक्त शब्द दूँढ़कर लिखिए:     [1]
      1. दुष्ट - 
      2. विद्वान - 
    2. निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए:    [1]
      1. बूँद →
      2. गिरी →
  2. उपर्युक्त पदूयांश से क्रमश: किन्हीं दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।    [2]
Appears in 1 question paper
Chapter: [12] बरषहिं जलद
Concept: बरषहिं जलद

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

इस वर्ष बड़ी भीषण गरमी पड़ रही थी। दिन तो अंगारे से तपे रहते ही थे, रातों में भी लू और उमस से चैन नहीं मिलता था। सोचा इस लिजलिजे और घुटनभरे मौसम से राहत पाने के लिए कुछ दिन पहाड़ों पर बिता आएँ।

अगले सप्ताह ही पर्वतीय स्थल की यात्रा पर निकल पड़े। दो-तीन दिनों में ही मन में सुकून-सा महसूस होने लगा था। वहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य, हरे-भरे पहाड़ गर्व से सीना ताने खड़े, दीर्घता सिद्ध करते वृक्ष, पहाड़ों की नीरवता में हल्का-सा शोर कर अपना अस्तित्व सिद्ध करते झरने, मन बदलाव के लिए पर्याप्त थे।

उस दिन शाम के वक्‍त झील किनारे टहल रहे थे। एक भुट्‌टेवाला आया और बोला- "साब, भुट्‌टा लेंगे। गरम-गरम भूनकर मसाला लगाकर दूँगा।" सहज ही पूछ लिया- "कितने का है ?"
"पाँच रुपये का।"
"क्‍या ? पाँच रुपये में एक भुट्‌टा। हमारे शहर में तो दो रुपये में एक मिलता है, तुम तीन ले लो।"

  1. संजाल पूर्ण कीजिए:       [2]
  2. 'प्रकृति मन को प्रसन्न करती है' विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।      [2]
Appears in 1 question paper
Chapter: [13] दो लघुकथाएँ (पूरक पठन) : कंगाल, सही उत्‍तर
Concept: कंगाल
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