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निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प-चयन द्वारा दीजिए।
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हैं जन्म लेते जगह में एक ही, मेह उन पर है बरसता एक-सा, छेदकर काँटा किसी की उंगलियाँ, फूल लेकर तितलियों को गोद में है खटकता एक सबकी आँख में |
(i) प्रस्तुत काव्यांश किससे संबंधित है? (1)
(क) फूल और तितलियों से
(ख) फल और पौधे से
(ग) पौधे और चाँदनी से
(घ) बड़प्पन की पहचान से
(ii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)
(I) सद्गुणों के कारण ही मानुस प्रेम का पात्र बनता है।
(II) परिवेशगत समानता सदैव अव्यवस्था को जन्म देती है।
(III) भौगोलिक परिस्थितियाँ प्राकृतिक भिन्नता का कारण हैं।
उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III
(iii) इस काव्यांश से हमें क्या सीख मिलती है? (1)
(क) मनुष्य के कर्म उसे प्रसिद्धि दिलाते हैं।
(ख) समान परिवेश में रहते हुए मनुष्य समान आदर पाते हैं।
(ग) किसी भी कुल में जन्म लेने से ही मनुष्य बड़ा हो सकता है।
(घ) समान पालन-पोषण होने पर अलग व्यक्तियों के स्वभाव समान होते हैं।
(iv) ‘फाड़ देता है किसी का वर वसन’ में ‘वसन’ शब्द का अर्थ है - (1)
(क) व्यसन
(ख) वस्त्र
(ग) वास
(घ) वासना
(v) कवितानुसार फूल निम्न में से कौन-सा कार्य नहीं करता? (1)
(क) भँवरों को अपना रस पिलाता है।
(ख) तितलियों को अपनी गोद में खिलाता है।
(ग) फल बनकर पशु-पक्षियों और मनुष्यों का पेट भरता है।
(घ) सुरों के शीश पर सोहता है।
Concept: अपठित पद्यांश
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:-
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पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है। अब उसकी चाल बदलने लगी है। वह कलों की पूजा को छोड़कर मनुष्यों की पूजा को अपना आदर्श बना रही है। इस आदर्श के दर्शाने वाले देवता रस्किन और टालस्टॉय आदि हैं। पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है। वहाँ के गंभीर विचार वाले लोग इस प्रभात का स्वागत करने के लिए उठ खड़े हुए हैं। प्रभात होने के पूर्व ही उसका अनुभव कर लेने वाले पक्षियों की तरह इन महात्माओं को इस नए प्रभात का पूर्व ज्ञान हुआ है और हो क्यों न? इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के भाई-बहन ही नहीं, उनकी सारी जाति पिस गई, उनके जीवन के धुरे टूट गए, उनका समस्त धन घरों से निकलकर एक-दो स्थानों में एकत्र हो गया। साधारण लोग मर रहे हैं, मज़दूरों के हाथ-पाँव फट रहे हैं, लहू बह रहा है! सर्दी से ठिठुर रहे हैं। एक तरफ दरिद्रता का अखंड राज्य है, दूसरी तरफ अमीरी का चरम दृश्य। परंतु अमीरी भी मानसिक दुखों से विमर्दित है। मशीनें बनाई तो गई थीं मनुष्यों का पेट भरने के लिए - मज़दूरों को सुख देने के लिए - परंतु वे काली-काली मशीनें ही काली बनकर उन्हीं मनुष्यों का भक्षण कर जाने के लिए मुख खोल रही हैं। प्रभात होने पर ये काली-काली बलाएँ टूर होंगी। मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय होगा। शोक का विषय यह है कि हमारे और अन्य पूर्वी देशों में लोगों को मज़दूरी से तो लेशमात्र भी प्रेम नहीं है, पर वे तैयारी कर रहे हैं पूर्वोक्त काली मशीनों का आलिंगन करने की। पश्चिम वालों के तो ये गले पड़ी हुई बहती नदी की काली कमली हो रही हैं। वे छोड़ना चाहते हैं, परंतु काली कमली उन्हें नहीं छोड़ती। देखेंगे पूर्व वाले इस कमली को छाती से लगाकर कितना आनंद अनुभव करते हैं। यदि हम में से हर आदमी अपनी दस उँगलियों की सहायता से साहसपूर्वक अच्छी तरह काम करे तो हम मशीनों की कृपा से बढ़े हुए परिश्रम वालों को वाणिज्य के जातीय संग्राम में सहज ही पछाड़ सकते हैं। सूर्य तो सदा पूर्व ही से पश्चिम की ओर जाता है। पर आओ पश्चिम से आनेवाली सभ्यता के नए प्रभात को हम पूर्व से भेजें। इंजनों की वह मज़दूरी किस काम की जो बच्चों, स्त्रियों और कारीगरों को ही भूखा नंगा रखती है और केवल सोने, चाँदी, लोहे आदि धातुओं का ही पालन करती है। पश्चिम को विदित हो चुका है कि इनसे मनुष्य का दुख दिन पर दिन बढ़ता है। |
- "पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है।" - पंक्ति में रेखांकित पद का आशय हो सकता है? 1
- नया प्रकाश
- नया विचार
- नया सवेरा
- नया प्रभास
- संदर्भ के अनुसार गद्यांश में 'विमर्दित' शब्द का सटीक अर्थ क्या हो सकता है? 1
- ठगी हुई
- ग्लानिपूर्ण
- ईर्ष्या पूर्ण
- पीड़ा पूर्ण
- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - 1
कथन (I): मानवीय दक्षता को महत्त्व देना चाहिए।
कथन (II): मनुष्य तथा मानवीयता से प्रेम करना चाहिए।
कथन (III): अपनी चाल को बदल लेना चाहिए।
कथन (IV): मानव जीवन को आदर्श मानना चाहिए।
गद्यांश के अनुसार कौन-सा/से कथन सही हैं?- केवल कथन I सही है।
- केवल कथन II सही है।
- केवल कथन II और III सही हैं।
- केवल कथन I और IV सही हैं।
- गद्यांश के अनुसार पूर्वी देशों की समस्या क्या है? 1
- मज़दूरों के लिए अधिकारों की कमी
- मज़दूरों का पूँजी पतियों द्वारा शोषण
- मज़दूरी को कम महत्त्व का आंकना
- मज़दूरी पर अमीरी का प्रभाव
- गद्यांश के अनुसार साधारण लोग क्यों मर रहे हैं? 1
- मानव श्रम से ज्यादा मशीनों को महत्त्व मिलने के कारण
- हाथ-पाँव फटने, खून रिसने और सर्दी के कारण
- कम मज़दूरी मिलने कारण हुई बीमारियों से
- कार्य क्षेत्रों के विषैले पर्यावरण व खाने की कमी से
- गद्यांश में मशीनों को 'काली मशीनें' कहना किस बात की ओर संकेत करता है? 1
- काला रंग शोक का प्रतीक होता है।
- मशीनों द्वारा जन साधारण में बेरोज़गारी बढ़ाने के कारण
- माँ दुर्गा के अवतार काली के जैसे भक्षण करने के कारण
- मशीनों से अमीरों द्वारा काले धन अर्जन करने के कारण
- "इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के....." इस प्रक्रिया के क्या परिणाम हुए? 1
- आर्थिक संपदा का अनुचित वितरण
- भाई बहनों व अन्य रिश्तेदारों में दुराव
- समस्त जाति द्वारा कठिन परिश्रम
- मशीनों द्वारा मनुष्यों का संरक्षण
- रस्किन और टालस्टॉय का महत्त्व है क्योंकि इन्होनें ______ । 1
- पूर्वी देशों में साम्राज्यवाद के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी।
- मानवीय संवेदनाओं एवं गुणों को महत्त्व दिया था।
- धार्मिक कट्टरता के प्रति चेतना जगाई थी।
- गाँधी जी इन दोनों के विचारों से अत्याधिक प्रभावित थे।
- मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय कब होगा? 1
- मज़दूरों द्वारा क्रांति करने से
- मशीनों के हट जाने से
- सभी लोगों को काम मिलने से
- मानवीय दक्षताओं को महत्त्व मिलने से
- मनुष्य के दुख में निरंतर वृद्धि का क्या कारण बताया गया है? 1
- मशीनों पर अत्यधिक आश्रित हो जाना
- मानवीय दक्षता की आलोचना
- पूँजी पतियों द्वारा गरीबों का शोषण
- काली मशीनों द्वारा मनुष्यों का भक्षण
Concept: अपठित गद्यांश
दिए गए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:
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कुश्ती कोई भी लड़े बहुत गहरा है रिश्ता ढोल ख़ामोश है ख़ामोश ढोल को |
- ढोल बजाता है सिमरू ही - पंक्ति में 'ही' क्या इंगित करता है? 1
- आदत
- महत्त्व
- आडंबर
- प्रेम
- कुश्ती में जोश कब भर आता है? 1
- जब हारता हुआ पहलवान जीतने लगता है।
- जब दोनों पहलवान बराबर की टक्कर वाले होते है।
- जब फ़ाइनल कुश्ती द्वारा राष्ट्रीय विजेता तय होता है।
- जब सिमरू द्वारा ढ़ोल बजाया जाता है।
- माटी द्वारा अच्छे-बुरे को स्वीकारने का क्या तात्पर्य है? 1
- माटी सबको जीतने का समान अवसर देती है।
- माटी का न्याय सबको स्वीकार्य होता है।
- अंत में अच्छे-बुरे सभी माटी में मिल जाते हैं।
- माटी की गोद में अच्छे-बुरे सभी पलते हैं।
- ढोल तथा अखाड़े की माटी में क्या समानता बताई गई है? 1
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
कथन (I): दोनों को उपयोग करने से पहले तैयार करना होता है।
कथन (II): दोनों में श्रम की आवश्यकता होती है।
कथन (III): दोनों का प्रयोग कर लोग अपनी कला सिद्ध करते है।
कथन (IV): दोनों की परिवर्तन में भूमिका होती है।
निम्नलिखित विकल्पों पर विचार कीजिए तथा सही विकल्प चुनकर लिखिए।
विकल्प:- केवल कथन (III) सही है।
- केवल कथन (IV) सही है।
- केवल कथन (II) और (III) सही हैं।
- केवल कथन (I) और (IV) सही हैं।
- कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए। 1
कॉलम 1 कॉलम 2 1 सिमरू (i) श्रमजीवी वर्ग 2 ढोल (ii) सामाजिक भूमि 3 अखाड़ा (iii) परिश्रम
- 1 - (iii), 2 - (i), 3 - (ii)
- 1 - (i), 2 - (iii), 3 - (ii)
- 1 - (i), 2 - (ii), 3 - (iii)
- 1 - (ii), 2 - (i), 3 - (iii)
Concept: अपठित पद्यांश
अभिलाषाओं की राख से तात्पर्य है -
Concept: सूरदास की झोंपड़ी
सूरदास कहाँ तो नैराश्य, ग्लानि, चिंता और क्षोभ के अपार जल में गोते खा रहा था, कहाँ यह चेतावनी सुनते ही उसे ऐसा मालूम हुआ किसी ने उसका हाथ पकड़कर किनारे पर खड़ा कर दिया।
नकारात्मक मानवीय पहलुओं पर अकेले सूरदास का व्यक्तित्व भारी पड़ गया। जीवन मूल्यों की दृष्टि से इस कथन पर विचार कीजिए।
Concept: सूरदास की झोंपड़ी
'तो हम सौ लाख बार बनाएंगे' इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र की विशेषता है -
Concept: सूरदास की झोंपड़ी
'अभिलाषाओं की राख है' से क्या अभिप्राय है?
Concept: सूरदास की झोंपड़ी
कथन (A) - जीवन के मर्म का ज्ञान ही दुखों से मुक्ति है।
कारण (R) - सूरदास विजय गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा।
Concept: सूरदास की झोंपड़ी
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
"सच्चे खिलाड़ी कभी रोते नहीं, बाजी पर बाजी हारते हैं, चोट पर चोट खाते हैं, धक्के सहते हैं पर मैदान में डटे रहते हैं।" परीक्षा के समय को आधार मानकर 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ क्या संदेश देता है?
Concept: सूरदास की झोंपड़ी
देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?
Concept: देवसेना का गीत
‘जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’- पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Concept: कार्नेलिया का गीत
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
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लघु सुरधनु से पंख पसारे-शीतल मलय समीर सहारे। उड़ते खग जिस ओर मुँह किए-समझ नीड़ निज प्यारा। बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल। लहरें टकराती अनंत की-पाकर जहाँ किनारा। हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे। मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा। |
Concept: कार्नेलिया का गीत
सरोज का विवाह अन्य विवाहों से किस प्रकार भिन्न था?
Concept: सरोज स्मृति
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए -
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भर जलद धरा को ज्यों अपार; मुझ भाग्यहीन की तू संबल |
(1) ‘भर जलद धरा को ज्यों अपार’ पंक्ति द्वारा प्रतिपादित किया गया है - (1)
(क) वैमनस्य
(ख) अनुभव
(ग) स्नेह
(घ) प्रकाश
(2) कवि स्वयं को भाग्यहीन कहकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं? (1)
(क) मनचाही प्रसिद्धि न मिलना
(ख) सरोज की आर्थिक दशा
(ग) सरोज ही एकमात्र सहारा
(घ) पारिवारिक सदस्यों से बिछोह
(3) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)
- कवि सरोज को शकुंतला के समान मानते थे।
- पुत्री सरोज की मृत्यु असमय हो गई थी।
- सरोज की मृत्यु अपनी ससुराल में हुई थी।
इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -
(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (ii)
(घ) (ii) और (iii)
(4) ‘हो इसी कर्म पर वज्रपात’ के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि वह - (1)
(क) कष्टदायक जीवन के बाद धार्मिक बन रहे हैं।
(ख) मस्तक पर वज्रपात सहने का साहस कर रहे हैं।
(ग) समस्त जीवन दुख में ही व्यतीत करते रहे हैं।
(घ) प्रतिकूलताओं के आगे आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
(5) दुख ही जीवन की कथा रही के माध्यम से प्रकट हो रही है - (1)
(क) शैशवावस्था
(ख) वृदूधावस्था
(ग) वियोगावस्था
(घ) विश्लेषणावस्था
(6) ‘क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’
पंक्ति के माध्यम से कवि की स्वाभाविक विशेषता बताने के लिए सूक्ति कहीं जा सकती है - (1)
(क) पर उपदेश कुशल बहुतेरे
(ख) बिथा मन ही राखो गोय
(ग) मुझसे बुरा न कोय
(घ) मन के हारे हार है
Concept: सरोज स्मृति
‘मैंने देखा, एक बूँद’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।
Concept: मैंने देखा, एक बूँद
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए -
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जो है वह खड़ा है किसी अलक्षित सूर्य को |
(क) जो है वह खडा है बिना किसी स्तंभ के.......' वह जो बिना सहारे के खड़ी है - (1)
- दार्शनिकता
- आध्यात्मिकता
- धुएं की विशालता
- पानी की पवित्रता
(ख) 'अपनी दूसरी टांग से बिल्कुल बेखबर' पंक्ति का आशय है कि - (1)
- अध्यात्मिकता से अनभिज्ञ होना
- आधुनिकता से अनभिज्ञ होना
- सांसारिकता से अनभिज्ञ होना
- दार्शनिकता से अनभिज्ञ होना
(ग) राख के स्तंभ से क्या अभिप्राय है? (1)
- पूजा-पाठ की सामग्री के ढेर से
- शवों के राख के ढेर से
- मिट्टी के ढेर से
- मुरझाए फूलों के ढेर से
(घ) आस्था, विरक्ति, विश्वास, आश्चर्य और भक्ति का मिला-जुला रूप दिखाई देता है - (1)
- श्रद्धा और अंधभक्ति में
- मोक्ष की अवधारणा में
- मिथकीय आस्था में
- बनारस की आध्यात्मिकता में
(ङ) मनुष्य के हाथ स्तंभ की भांति खड़े हो जाते हैं - (1)
- मंदिर की ध्वजा को प्रमाण करने के लिए
- अदृश्य को अर्घ्य देने के लिए
- किसी की मदद के लिए
- श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए
Concept: बनारस
‘तोड़ो’ कविता नवसृजन की प्रेरणा है। कथन के आलोक में अपने विचार प्रकट कीजिए।
Concept: तोड़ो
निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
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ये पत्थर ये चट्टानें तोड़ो तोड़ो तोड़ो |
Concept: तोड़ो
निम्नलिखित पंक्तियों में निहित काव्य सौंदर्य लिखिए।
पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े।
नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा।
एहि ते अधिक कहौं मैं काहा॥
Concept: भरत-राम का प्रेम
वियोगावस्था में सुख देने वाली वस्तुएँ भी दुख देने लगती हैं। 'गीतावली' से संकलित पदों के आधार पर सिद्ध कीजिए।
Concept: भरत-राम का प्रेम
