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Revision: जैव-अणु Chemistry (रसायन विज्ञान) Science (Hindi Medium) Class 12 [कक्षा १२] CBSE

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Definitions [3]

प्रोटीन के संदर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए।

विकृतीकरण

जैविक निकाय में पाई जाने वाली विशेष त्रिविम संरचना तथा जैविक सक्रियता वाले प्रोटीन, प्राकृत प्रोटीन कहलाता हैं। जब प्राकृत प्रोटीन में भौतिक परिवर्तन करते हैं, जैसे ताप में परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन करते हैं, जैसे pH में परिवर्तन आदि किया जाता है तो हाइड्रोजन आबंधों में अस्तव्यस्तता उत्पन्न हो जाती है। जिसके कारण गोलिका (ग्लोब्यूल) खुल जाती है तथा हैलिक्स अकुंडलित हो जाती है तथा प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता को खो देता है। इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं। विकृतीकरण के दौरान द्वितीयक तथा तृतीयक संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं, परंतु प्राथमिक संरचना अप्रभावित रहती है। उबालने पर अंडे की सफेदी का स्कंदन विकृतीकरण का एक सामान्य उदाहरण है।

प्रोटीन के संदर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए।

पेप्टाइड बंध

रासायनिक रूप से पेप्टाइड आबंध, −COOH समूह तथा −NH2, समूह के मध्य बना एक आबंध होता है। दो एक जैसे अथवा भिन्न ऐमीनो अम्लों के अणुओं के मध्य अभिक्रिया एक अणु के ऐमीनो समूह तथा दूसरे अणु के कार्बोक्सिल समूह के मध्य संयोग से होती है जिसके फलस्वरूप एक जल का अणु मुक्त होता है तथा पेप्टाइड आबंध −CO−NH− बनता है। चूँकि उत्पाद दो ऐमीनो अम्लों के द्वारा बनता है, अत: इसे डाइपेप्टाइड कहते हैं।

उदाहरणार्थ, जब ग्लाइसीन का कार्बोक्सिल समूह, ऐलानीन के ऐमीनो समूह के साथ संयोग करता है तो हमें एक डाइपेप्टाइड, ग्लाइसिलऐलेनीन प्राप्त होता है।

 

प्रोटीन के संदर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए।

प्राथमिक संरचना

प्रोटीन में एक अथवा अनेक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ उपस्थित हो सकती हैं। किसी प्रोटीन के प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड में ऐमीनो अम्ल एक विशिष्ट क्रम में संयुक्त होते हैं। ऐमीनो अम्लों का यह विशिष्ट क्रम प्रोटीनों की प्राथमिक संरचना बनाता है। प्राथमिक संरचना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन अर्थात् ऐमीनो अम्लों के क्रम में परिवर्तन से भिन्न प्रोटीन उत्पन्न होते हैं।

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