English

यह जो मेरे सामने कुटज का लहराता पौधा खड़ा है वह नाम और रूप दोनों में अपनी अपराजेय जीवनी की घोषणा कर रहा है। इसीलिए यह इतना आकर्षक है। नाम है कि हजारों वर्ष से जीता चला आ रहा - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

Question

निम्नलिखित गद्यांश के सप्रसंग व्याख्या 100 शब्दों में कीजिए।

यह जो मेरे सामने कुटज का लहराता पौधा खड़ा है वह नाम और रूप दोनों में अपनी अपराजेय जीवनी की घोषणा कर रहा है। इसीलिए यह इतना आकर्षक है। नाम है कि हजारों वर्ष से जीता चला आ रहा है। कितने नाम आए और गए। दुनिया उनको भूल गई, वे दुनिया को भूल गए। मगर कुटज है कि संस्कृति की निरंतर स्फीयमान शब्दराशि में जो जमके बैठा, सो बैठा ही है। और रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है। और मूर्ख के मस्तिष्क से भी अधिक सूने गिरि कांतार में भी ऐसा मस्त बना है कि ईर्ष्या होती है।
Writing Skills
Advertisements

Solution

संदर्भ: यह गद्यांश ‘कुटज’ पाठ से लिया गया है, जिसके लेखक श्री शिवप्रसाद सिंह हैं। इसमें कुटज नामक औषधीय वृक्ष के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सहनशीलता और जीवन-दर्शन को प्रस्तुत किया गया है।

प्रसंग: लेखक कुटज के पेड़ को देखकर उसके नाम, स्वरूप और उसकी स्वाभाविक उपयोगिता पर विचार करता है।

व्याख्या: लेखक कहता है कि कुटज वृक्ष हजारों वर्षों से जीवित परंपरा का प्रतीक है। अनेक नाम बदलते गए, पर कुटज का महत्व बना रहा। वह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का जीवंत हिस्सा है। कुटज दुख और पीड़ा दूर करने वाली औषधि देता है, इसलिए यह मानवता के लिए आशीर्वाद है। कठोर जलवायु, विपरीत परिस्थितियों और उपेक्षा के बाद भी यह हरा रहता है, जिससे धैर्य, त्याग और संघर्ष का संदेश मिलता है।

विशेष: इस गद्यांश में कुटज को भारतीय सहनशीलता, परंपरा और औषधीय महत्त्व का प्रतीक बताया गया है।

shaalaa.com
  Is there an error in this question or solution?
2025-2026 (March) Board Sample Paper
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×