English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 6th Standard

यदि तुम्हें अलादीन का चिराग मिल जाए तो...

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Question

यदि तुम्हें अलादीन का चिराग मिल जाए तो...

Short/Brief Note
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Solution

अगर मुझे अलाद्दीन का चिराग मिल जाए, तो मैं उससे अपनी तीन इच्छाएँ पूरी करने के लिए कहूँगा। मेरी पहली इच्छा होगी कि सभी बच्चों को पर्याप्त शिक्षा मिले। मेरी दूसरी इच्छा होगी कि दुनियाभर के सभी लोग रोगमुक्त व स्वस्थ रहें। मेरी तीसरी इच्छा होगी कि पूरी दुनिया में भाईचारे की भावना निर्मित हो।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 2.03: कठपुतली - कठपुतली [Page 34]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
Chapter 2.03 कठपुतली
कठपुतली | Q (२) | Page 34

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“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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