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डाकिया इंटरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब (डब्ल्यू.डब्ल्यू.डब्ल्यू: www) तथा पक्षी और बादल-इस तीनों संदेश वाहकों के विषय में अपनी कल्पना से एक लेख तैयार कीजिए। ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनिया’ पाठ का सहयोग ले सकते

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Question

डाकिया इंटरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब (डब्ल्यू.डब्ल्यू.डब्ल्यू: www) तथा पक्षी और बादल-इस तीनों संदेश वाहकों के विषय में अपनी कल्पना से एक लेख तैयार कीजिए। ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनिया’ पाठ का सहयोग ले सकते

Very Long Answer
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Solution

संदेश पहुँचाने की परंपरा मानव सभ्यता जितनी ही पुरानी है। समय के साथ संदेश वाहक बदलते रहे हैं, कभी डाकिया ने चिट्ठियाँ पहुँचाईं, तो कभी पक्षी आसमान में उड़कर संदेश लाए, और आज इंटरनेट का वर्ल्ड वाइड वेब (www) और यहाँ तक कि बादल भी मानो हमारे संदेशों के प्रतीक बन गए हैं।

डाकिया कभी हर घर की पहचान हुआ करता था। उसके थैले में सिर्फ पत्र नहीं, लोगों की उम्मीदें, खुशियाँ, आँसू और समाचार होते थे। गाँव की गलियों से लेकर शहर की सड़कों तक, वह रिश्तों की डोर को बाँधने का काम करता था। उसका इंतज़ार कई आँखें करती थीं।

प्राचीन समय में पक्षियों का प्रयोग संदेश पहुँचाने के लिए किया जाता था। कबूतरों को विशेष प्रशिक्षण देकर राजा-महाराजा समाचार भेजा करते थे। ये पक्षी मानव और प्रकृति के बीच जीवंत संबंध का प्रतीक थे, तेज़, सच्चे और विश्वसनीय संदेशवाहक।

आज का युग तकनीक का युग है। डाकिए और कबूतरों की जगह अब इंटरनेट ने ले ली है। वर्ल्ड वाइड वेब (www) के माध्यम से हम पलभर में दुनिया के किसी भी कोने में संदेश भेज सकते हैं, ईमेल, सोशल मीडिया और वीडियो कॉल ने दूरी की परिभाषा ही बदल दी है। यह सबसे तेज़ और सशक्त माध्यम बन गया है।

कवि और लेखक अक्सर बादलों को भी संदेशवाहक मानते हैं। वे कल्पना करते हैं कि बादल दूर देशों तक प्रेम, आशा और भावनाओं के संदेश ले जाते हैं। साहित्य में बादल को “मेघदूत” के रूप में अमर बना दिया गया है।

समय बदल गया है, पर संदेशों का महत्व नहीं बदला। चाहे डाकिया हो या इंटरनेट, पक्षी हों या बादल ये सभी मानव संवेदनाओं के पुल हैं। हर युग का अपना संदेशवाहक होता है, पर उद्देश्य एक ही दिलों को जोड़ना और संवाद बनाए रखना।

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पद्य (Poetry) (Class 8)
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Chapter 6: भगवान के डाकिए - अनुमान और कल्पना [Page 32]

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NCERT Hindi - Vasant Part 3 Class 8
Chapter 6 भगवान के डाकिए
अनुमान और कल्पना | Q 1 | Page 32

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पर्यायवाची चंद्रमा-शशि, इंदु, राका मधुकर-भ्रमर, भौंरा, मधुप सूर्य-रवि, भानु, दिनकर
विपरीतार्थक

दिन-रात
श्वेत-श्याम
शीत-उष्ण

पाठों से दोनों प्रकार के शब्दों को खोजकर लिखिए।


"हरी घास पर बिखरे दी हैं
ये किसने मोती की लड़ियाँ?"

ऊपर की पंक्तियों को उलट-फेर कर इस तरह भी लिखा जा सकता है–
"हरी घास पर ये मोती की लड़ियाँ किसने बिखेर दी हैं?"

इसी तरह नीचे लिखी पंक्तियों में उलट-फेर कर तुम भी उसे अपने ढंग से लिखो।

"नभ के नन्हें तारों में ये
कौन दमकते हैं यों दमदम?"


चमक - चमकना - चमकाना - चमकवाना

‘चमक’ शब्द के कुछ रूप ऊपर लिखे हैं। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों का रूप बदलकर सही जगह पर भरो -

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