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Question
व्यवहार चिकित्सा में प्रयुक्त विभिन्न तकनीकों की चर्चा कीजिए।
Answer in Brief
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Solution
व्यवहार चिकित्सा का मानना है की मनोवैज्ञानिक कष्ट दोषपूर्ण व्यापार प्रतिरूपो या विचार प्रतिरूपो के कारण उतपन्न होते है। अतः इनका केंद्र बिंदु सेवार्थी में विद्यमान व्यवहार और विचार होते है। उसका अतीत केवल उसके दोषपूर्ण व्यवहार तथा विचार प्रति रूपों की उतपति को समझने के संदर्भ में महत्वपूर्ण होता है। अतीत को फिर से सक्रिय नहीं किया जाता। वर्तमान में केवल दोषपूर्ण प्रतिरूपो में सुधार किया जाता है।
- निषेधात्मक प्रबलन का तात्पर्य वांछित अनुक्रिया के साथ संलग्न एक ऐसे परिणाम से है जो कष्टकर या पसंद न किया जाने वाला हो। उदाहरणर्थ, एक अध्यापक कक्षा में शोर मचाने के लिए एक बालक को फटकार लगता है। यह निषेधात्मक प्रबलन है।
- विमुखी अनुबंधन का संबंध अवांछित अनुक्रिया के विमुखी परिणाम के साथ पुनरावृत्त साहचर्य से है। उदाहरण के लिए, एक मद्यव्यसनी को बिजली का एक हल्का आघात दिया जाये और मघ सैघने को कहा जाये। ऐसे पुनरावृत्त युग्मन से मघ की गंध उसके लिए अरुचिकर हो जाएगी क्योंकि बिजली के आघात की पीड़ा के साथ इसका साहचर्य स्थापित हो जायेगा और व्यक्ति मद्य छोड़ देगा।
- यदि कोई अनुकूली व्यवहार कभी - कभी ही घटित होता है तो इस न्यूनता को बढ़ाने के लिए सकारत्मक प्रचलन दिया जाता है। उदाहरण के लिए यदि एक बालक गृहकार्य नियमित रूप से नहीं करता तो उसकी माँ नियम समय गृहकार्य करने के लिए सकारात्मक प्रबलन के रूप में बच्चे को मनपसंद पकवान बनाकर दे सकती है। मनपसंद भोजन का सकारात्मक प्रबलन उसके नियम समय पर गृह कार्य करने के व्यवहार को बढ़ाएगा। व्यवहारत्मक समस्याओं वाले लोगो को कोई वांछित व्यवहार करने पर हर बार पुरस्कार के रूप में एक टोकन दिया जा सकता है। ये टोकन संगृहीत किये जाते है और किसी पुरस्कार से उनका विनिमय यो आदान - प्रदान किया जाता है,
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चिकित्सा के प्रकार
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