Advertisements
Advertisements
Question
व्यक्ति की पहचान उसकी पोशाक से होती है। इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
Advertisements
Solution
मनुष्य की पहली पहचान उसकी पोशाक से होती है। गरीब-अमीर, गंभीर-चंचल, सब प्रकार के लोगों की अलग पहचान होती है। सुदामा की पोशाक देखकर कृष्ण के द्वारपालों ने उसे अंदर ही नहीं आने दिया। एक राजा का मित्र भला फटेहाल कैसे हो सकता है?
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था?
लेखक ने किस तरह अत्यंत सूझ-बूझ से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया? ‘स्मृति’ पाठ के आलोक में स्पष्ट कीजिए। इससे आपको क्या सीख मिलती है?
आज समाज में हामिद जैसों की आवश्यकता है। इससे आप कितना सहमत हैं और क्यों?
कनकापुरा में गांधी जी की सभा के बाद आगे की यात्रा में परिवर्तन क्यों कर दिया गया?
सरदार पटेल के चरित्र से आप किन-किन मूल्यों को अपनाना चाहेंगे?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए:
लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया माँ ने क्या-क्या उपाय किए?
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिर जाने देतीं उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −
लेखिका को ध्वज जैसा क्या लगा?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
लोपसांग ने तंबू का रास्ता कैसे साफ़ किया?
गांधी जी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाते थे।
समय का अभाव होने पर भी महादेव भाई ने किस प्रकार साहित्यिक योगदान दिया?
महादेव की लिखावट के बारे में सिविलियन और गवर्नर की क्या राय थी?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
पाश्चात्य देशों में धनी और निर्धन लोगों में क्या अंतर है?
वह कौन-सी बात थी, जो लेखिका को डराने के लिए काफ़ी थी?
लेखिका अंगदोरजी के साथ एवरेस्ट अभियान पर आगे क्यों चल पड़ी?
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए -
इनके कपड़े देने हैं। (स्थानसूचक प्रश्नवाची)
‘आर्थिक सीमाओं की बैंजनी चट्टान’ कहकर लेखक ने किस ओर संकेत किया है?
लेखक ने अतिथि का स्वागत किसे आशा में किया?
अतिथि रूपी देवता और लेखक रूपी मनुष्य को साथ-साथ रहने में क्या परेशानियाँ दिख रही थीं?
उदाहरण के अनुसार ‘त्व’ प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइए-
उदाहरण : देव + त्व = देवत्व
