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“वह शर इधर गांडीव गुण से भिन्न जैसे ही हुआ, धड़ से जयद्रथ का उधर सिर छिन्‍न वैसे ही हुआ।” - काव्य-पंक्ति में अलंकार है -

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Question

“वह शर इधर गांडीव गुण से भिन्न जैसे ही हुआ, धड़ से जयद्रथ का उधर सिर छिन्‍न वैसे ही हुआ।” - काव्य-पंक्ति में अलंकार है -

Options

  • मानवीकरण

  • अतिशयोक्ति

  • उत्प्रेक्षा

  • श्लेष

MCQ
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Solution

अतिशयोक्ति

shaalaa.com
अलंकार
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2022-2023 (March) Delhi 3
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