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Question
तुम क्या सोचते हो स्कूल में सज़ा होनी चाहिए?
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Solution
मेरे अनुसार, स्कूल में सज़ा नहीं होनी चाहिए।
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अपनी टीचर की मदद से चार-पाँच बाँसों को बाँध कर एक छोटा-सा पुल बनाओ। उस पर चल कर देखो।
- तुम्हें कैसा लगा?
- गिरे तो नहीं?

जूते या चप्पल पहन कर पुल पर चलना ज़्यादा आसान होगा या नंगे पैर? क्यों?

अगर तुम्हें मौका मिले, तो तुम कौन-से पुल से जाना चाहोगे? क्यों?

स्कूल जाने के लिए क्या तुम भी कोई पुल पार करते हो? वह पुल कैसा दिखाई देता है? उसका चित्र बनाओ।

अपने दादा-दादी से पता करो कि उनके बचपन के समय में पुल कैसे होते थे?
क्या तुम भी कभी उँट-गाड़ी या ताँगे पर बैठे हो? कहाँ? खुद चढ़े थे या किसी ने बिठाया था?
क्या तुम्हें साइकिल चलानी आती है? यदि हाँ, तो किससे सीखी?

क्या तुम बता सकते हो, इसे ‘जुगाड़’ क्यों कहते हैं?
क्या स्कूल पहुँचने में तुम्हें भी कोई परेशानी होती है?
मैदान में या स्कूल में किसी खुली जगह पर सब बच्चे इकट्टे हो जाओ। अब नीचे दी गई स्थितियों में तुम कैसे चलोगे, करके दिखाओ।
- अगर ज़मीन एकदम गुलाब की पंखुड़ियों जैसी हो।
- अगर ज़मीन काँटों-भरे मैदान में बदल गई हो और आस-पास ऊँची-ऊँची घास हो।
- अगर ज़मीन ठंडी-ठंडी बर्फ से ढँक गई हो।
क्या हर बार तुम्हारी चाल बदली? चर्चा करो।
