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Question
टिप्पणी लिखिए।
मराठी रंगमंच
Short/Brief Note
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Solution
- व्यक्ति अथवा समुदाय द्वारा कोई भी ललित कला जिस स्थान पर प्रस्तुत की जाती है, उसे 'रंगमंच' कहते हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में मराठी रंगमंच का उदय हुआ। विष्णुदास भावे 'मराठी रंगमंच के जनक' के रूप में जाने जाते हैं।
- आरंभ में ऐतिहासिक तथा पौराणिक नाटकों के साथ-साथ प्रहसन भी रंगमंच पर आए। इन नाटकों की लिखित संहिता नहीं होती थी।
- 'थोरले माधवराव पेशवे' नाटक के कारण पूर्णतः लिखित संहितावाले नाटकों की परंपरा शुरू हुई। सामाजिक समस्याएँ और ऐतिहासिक विषय नाटक में उठाए गए।
- मराठी रंगमंच की गिरती अवस्था में आचार्य अत्रे के नाटकों ने रंगमंच को संवारने का काम किया। वि. वा. शिरवाडकर, विजय तेंडुलकर तथा वसंत कानेटकर जैसे लेखकों ने मराठी रंगमंच को समृद्ध बनाने का कार्य किया।
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मराठी रंगमंच
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