Advertisements
Advertisements
Question
|
तीन छात्राएँ श्वेता, आयेशा एवं समृद्धि उन कारकों को समझने के लिए एक प्रयोग कर रही थी जिन पर किसी चालक का प्रतिरोध निर्भर करता है। उनमें से प्रत्येक ने एक सेल, एक ऐमीटर, एक प्लग कुंजी और तार से एक विद्युत परिपथ पूरा किया। श्वेता ने ‘l’ लंबाई के नाइक्रोम के तार को परिपथ में लगाकर, कुंजी को बंद कर, ऐमीटर में धारा का पाठ्यांक लिया। आयेशा ने समान मोटाई लेकिन दुगनी लम्बाई ‘2l’ का नाइक्रोम का तार परिपथ में लगाकर कुंजी को बन्द किया और ऐमीटर में धारा का पाठ्यांक लिया। समृद्धि ने समान मोटाई तथा ‘l’ लम्बाई के ताँबे के तार को परिपथ में लगाकर कुंजी को बन्द किया और ऐमीटर में धारा का पाठ्यांक लिया। |
(a) यदि ‘l’ लम्बाई के नाइक्रोम के तार के साथ ऐमीटर का पाठ्यांक X ऐम्पीयर है, तो ऐमीटर का पाठ्यांक क्या होगा यदि नाइक्रोम के तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल को समान रखते हुए, लम्बाई को दोगुना कर दिया जाये?
(b) ऐमीटर का पाठ्यांक क्या होगा यदि नाइक्रोम तार की लम्बाई ‘l’ समान रखते हुए, तार के अनुप्रस्थ-काट का क्षेत्रफल दोगुना कर दिया जाये?
(c) ‘प्रतिरोधकता’ को परिभाषित कीजिए। इसका SI मात्रक लिखिए। मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता की तुलना उनकी घटक धातुओं से कीजिए।
अथवा
(c) कारण दीजिए:
- विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः केवल टंगस्टन का ही उपयोग किया जाता है।
- ब्रेड टोस्टर के ऊष्मक-चालक शुद्ध धातुओं के न बनाकर मिश्रातुओं के बनाएं जाते हैं।
Advertisements
Solution
(a) किसी तार का प्रतिरोध उसकी लंबाई के सीधे समानुपाती होता है।
R ∝ l
यदि लंबाई दोगुनी कर दी जाए, तो प्रतिरोध भी दोगुना हो जाता है।
ओम के नियम के अनुसार,
`I = V/R`
अतः धारा, प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
`I ∝ 1/R`
इसलिए, यदि प्रतिरोध दोगुना हो जाए, तो धारा आधी हो जाती है।
नई धारा = `X/2`
(b) प्रतिरोध, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
`R ∝ 1/A`
यदि क्षेत्रफल दोगुना कर दिया जाए, तो प्रतिरोध आधा हो जाता है।
ओम के नियम के अनुसार,
अतः जब प्रतिरोध कम होता है, तो धारा बढ़ जाती है।
यदि प्रतिरोध आधा हो जाए, तो धारा दोगुनी हो जाती है।
नई धारा = 2X
प्रतिरोधकता किसी पदार्थ का वह गुण है, जो यह मापता है कि वह विद्युत धारा के प्रवाह का कितना विरोध करता है।
`ρ = (RA)/l`
इसकी SI इकाई ओम-मीटर (Ω m) होती है।
मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता सामान्यतः उनके शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है। इसका कारण यह है कि अशुद्धियाँ और अनियमित संरचना इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के प्रतिरोध को बढ़ा देती हैं।
(c) (i) टंगस्टन का गलनांक बहुत अधिक होता है और यह बिना पिघले उच्च तापमान सहन कर सकता है। इसमें उच्च प्रतिरोध होता है तथा गर्म करने पर यह प्रकाश उत्सर्जित करता है, इसलिए यह बल्ब के फिलामेंट के लिए उपयुक्त होता है।
अथवा
(ii) मिश्रधातुओं का प्रतिरोध अधिक होता है और गर्म होने पर वे आसानी से ऑक्सीकरण नहीं करतीं। वे अधिक समय तक टिकती हैं और शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक ऊष्मा उत्पन्न करती हैं।
