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Question
स्थलाकृतिक मानचित्र निर्वचन का क्या अर्थ है। तथा इसकी विधि क्या है, इसकी विवेचना कीजिए।
Answer in Brief
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Solution
स्थलाकृतिक मानचित्र निर्वचन में उन कारकों का अध्ययन शामिल है, जो मानचित्र पर दिखाए गए अनेक लक्षणों के बीच संबंधों को समझने में सहायता करते हैं। उदाहरण के लिए स्थलाकृतिक मानचित्रों पर प्राकृतिक वनस्पतियों के वितरण तथा कृषि के अन्तर्गत क्षेत्रों को भू-आकृतियों एवं अपवाह तंत्र की पृष्ठभूमि में ठीक से समझ सकते हैं। इसी प्रकार बस्तियों के वितरण को परिवहन के साधनों एवं स्थलाकृतियों के द्वारा पहचाना जा सकता है। निम्नलिखित चरण एवं विधियाँ मानचित्रों की व्याख्या में सहायता प्रदान करते हैं
- स्थलाकृतिक मानचित्र में स्थलाकृतिक शीट सूचक संख्या के अनुसार भारत में इसकी अवस्थिति ज्ञात की जा सकती है। इससे बृहत एवं मध्यम स्तर वाले भूआकृतिक विभागों की सामान्य विशेषताओं की भी जानकारी मिलती है।
- ट्रेसिंग पेपर पर निम्नलिखित को दर्शाना :
- मुख्य स्थलाकृतियाँ – समोच्च रेखाओं द्वारा दिखाना।
- अपवाह एवं जलीय लक्षण – मुख्य नदी एवं उसकी महत्वपूर्ण सहायक नदियाँ।
- भूमि उपयोग, जैसे – वन, कृषिगत भूमि, बेकार भूमि, पशु विहार पार्क, विद्यालय आदि।
- बस्तियाँ एवं परिवहन प्रतिरूप।
- प्रत्येक लक्षण के वितरण-प्रतिरूप का वर्णन सबसे महत्वपूर्ण पक्षों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए अलग-अलग करना।
- एक समय में मानचित्रों के एक जोड़े को अध्यारोपित करके, यदि किन्हीं दो प्रारूपों के बीच कोई संबंध है। तो उसे लिखिए। उदाहरण के लिए अगर एक समोच्च मानचित्र भूमि उपयोग से मिल जाता है तो ढाल के डिग्री एवं उपयोग में आने वाली भूमि के बीच संबंध को बताएगा।
एक ही क्षेत्र के हवाई चित्रों तथा उपग्रही प्रतिबिंबों की तुलना उस क्षेत्र के स्थलाकृतिक मानचित्र के द्वारा की जा सकती है।
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स्थलाकृतिक मानचित्रों का निर्वचन
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