English

स्पष्ट कीजिए कि क्यों- कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है,

Advertisements
Advertisements

Question

स्पष्ट कीजिए कि क्यों-

कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है, खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्टी में रखते हैं। तो वह ताप का सही मान मापता है?

Answer in Brief
Advertisements

Solution

इसका कारण यह है कि खुले में रखे तप्त लोहे का गोला तेजी से ऊष्मा खोता है और ऊष्मा धारिता कम होने के कारण तेजी से ठण्डा होता जाता है, इससे उत्तापमापी को पर्याप्त विकिरण ऊर्जा लगातार नहीं मिल पाती। इसके विपरीत भट्ठी में रखने पर गोले का ताप स्थिर बना रहता है और वह नियत दर से विकिरण उत्सर्जित करता रहता है।

shaalaa.com
ऊष्मामिति
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 10: द्रव्य के तापीय गुण - अभ्यास [Page 313]

APPEARS IN

NCERT Bhautiki Bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
Chapter 10 द्रव्य के तापीय गुण
अभ्यास | Q 11.19 (c) | Page 313
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×