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Question
समानभावमयी: पड्क्ती: योजयत -
| यथा (i) नास्ति विद्यासमं चक्षु:। | (क) मुखकमले निवासं कुर्यात्। | (i) ग |
| (ii) व्ययतः वृद्धिमायाति। | (ख) वाङ्माधुर्यात् नान्यदस्ति प्रियत्वम्। | (ii) |
| (iii) वदनाम्बुजे सन्निधिं क्रियात्। | (ग) सर्वस्य लोचनं शास्त्रम्। | (iii) |
| (iv) मधुरभाषिणी वाणी पुरुषं प्रह्लादयति। | (घ) शिक्ष्यते सहपाठिभि:। | (iv) |
| (v) पादं सब्रह्मचारिभि: | (ङ) दत्ता भवति विस्तृता। | (v) |
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Solution
| यथा (i) नास्ति विद्यासमं चक्षु:। | (ग) सर्वस्य लोचनं शास्त्रम्। |
| (ii) व्ययतः वृद्धिमायाति। | (ङ) दत्ता भवति विस्तृता। |
| (iii) वदनाम्बुजे सन्निधिं क्रियात्। | (क) मुखकमले निवासं कुर्यात्। |
| (iv) मधुरभाषिणी वाणी पुरुषं प्रह्लादयति। | (ख) वाङ्माधुर्यात् नान्यदस्ति प्रियत्वम्। |
| (v) पादं सब्रह्मचारिभि: | (घ) शिक्ष्यते सहपाठिभि:। |
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