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Question
सीमा पर तैनात फ़ौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यो में किसी न किसी रूप में देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे - सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन-जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए।
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Solution
हम भी देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों को पूरा कर के अपनी देशभक्ति का परिचय दे सकते हैं; जैसे -
- ज़रूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए।
- जितना हो सके हमें सरकार की सहायता करनी चाहिए।
- समाज में हो रहे अन्याय का विरोध करना चाहिए।
- हमें देश की प्रगति में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।
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RELATED QUESTIONS
आशय स्पष्ट कीजिए -
“बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।”
पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात् देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।
नगरपालिका द्वारा किसकी मूर्ति को कहाँ लगवाने का निर्णय लिया गया?
जिस कस्बे में मूर्ति लगवाई जानी थी उसका संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
नगरपालिका मूर्ति लगवाने में ठोस निर्णय क्यों नहीं ले पा रही थी?
नेताजी की मूर्ति का संक्षिप्त चित्रण कीजिए।
कैप्टन कौन था? उसका व्यक्तित्व नाम के विपरीत कैसे था?
कैप्टन मूर्ति के चश्मे को बार-बार क्यों बदल दिया करता था?
हालदार साहब के लिए कैप्टन सहानुभूति का पात्र था? इसे आप कितना उचित समझते हैं?
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए -
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जीप कस्बा छोड़कर आगे बढ़ गई तब भी हालदार साहब इस मूर्ति के बारे में ही सोचते रहे, और अंत में इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि कुल मिलाकर कस्बे के नागरिकों का यह प्रयास सराहनीय ही कहा जाना चाहिए। महत्त्व मूर्ति के रंग-रूप या कद का नहीं, उस भावना का है वरना तो देशभक्ति भी आजकल मजाक की चीज़ होती जा रही है। दूसरी बार जब हालदार साहब उधर से गुजरे तो उन्हें मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया। ध्यान से देखा तो पाया कि चश्मा दूसरा है। पहले मोटे फ्रेमवाला चौकोर चश्मा था, अब तार के फ्रेमवाला गोल चश्मा है। हालदार साहब का कौतूहल और बढ़ा। वाह भई! क्या आइडिया है। मूर्ति कपड़े नहीं बदल सकती लेकिन चश्मा तो बदल ही सकती है। |
- 'जीप कस्बा छोड़कर आगे बढ़ गई' अर्थात
A. जीप कस्बे में बिना रुके आगे बढ़ गई।
B. जीप कस्बे में रुक कर आगे बढ़ गई।
C. जीप कस्बे में रुक गई।
D. जीप कस्बे में नहीं गई। - हालदार साहब किसके विषय में सोचते रहे?
A. नेताजी के बारे में
B. मूर्ति के बारे में
C. चौराहे के बारे में
D. कस्बे के बारे में - 'वरना तो देशभक्ति भी आजकल मजाक की चीज़ होती जा रही है।' से आशय है...
A. आजकल देशभक्त होना संभव नहीं है।
B. आजकल देशभक्त होना हास्यास्पद हो गया है।
C. आजकल सभी देशभक्त हो गए हैं।
D. आजकल देशभक्ति की प्रासंगिकता नहीं है। - दूसरी बार जब हालदार साहब उधर से गुजरे तो उन्हें मूर्ति में क्या अंतर दिखाई दिया?
A. मूर्ति पर कोई चश्मा नहीं था।
B. मूर्ति पर पुराना चश्मा था।
C. मूर्ति पर एक नया चश्मा था।
D. मूर्ति छतिग्रस्त थी। - 'नेताजी का चश्मा' पाठ..
A. देशभक्ति के भाव पर व्यंग्य करता है।
B. देशभक्ति की प्रासंगिकता पर सवाल उठाता है।
C. देशभक्ति के महत्व को स्थापित करता है।
D. देशभक्ति के प्रति उम्मीद जगाता है।
पानवाले ने नेताजी की मूर्ति पर चश्मा न होने का कारण बताया - 'मास्टर बनाना भूल गया' - यह उसके लिए कैसी बात थी और हालदार साहब के लिए कैसी?
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:
हालदार साहब को नेताजी की मूर्ति में कौन-सी कमी नज़र आई और उन्होंने उसके कारण के विषय में क्या-क्या अनुमान लगाया?
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
कैप्टन नेताजी की मूर्ति पर लगा चश्मा अकसर क्यों बदल देता था? उसकी इस हरकत से आपके मन में उसके प्रति कौन-से भाव आते हैं?
