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शब्दों का खेल, परिवेश के अनुसार शब्द-चयन, लय, तुक, वाक्य संरचना,यति-गति बिंब, संक्षिप्तता के साथ-साथ विभिन्न अर्थ स्तर आदि सेकविता बनती है। दी गई कविता में इनकी पहचान कर अपने शब्दोंमें

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Question

शब्दों का खेल, परिवेश के अनुसार शब्द-चयन, लय, तुक, वाक्य संरचना,
यति-गति बिंब, संक्षिप्तता के साथ-साथ विभिन्न अर्थ स्तर आदि से
कविता बनती है। दी गई कविता में इनकी पहचान कर अपने शब्दों
में लिखें-

एक- जनता का
दुख एक।
हवा में उड़ती पताकाएँ
अनेक।

दैन्य दानव।
क्रूर स्थिति। कंगाल बुद्धि; मजूर घर भरा।
एक जनता का - अमरवर;
एकता का स्वर।
-अन्यथा स्वातंत्र्य इति।

Very Long Answer
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Solution

कवि ने आधुनिक काव्य-शिल्प का प्रयोग करते हुए बहुत कम शब्दों में गहरे और व्यापक भाव व्यक्त किए हैं। उचित शब्द-चयन के माध्यम से जनता की पीड़ा, परेशानी, असहायता और उसके भीतर छिपे विरोध को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा गया है। कवि ने जनता की स्थिति को विशेष शब्दों के माध्यम से स्पष्ट किया है।

हवा में लहराती पताकाएँ जनता के विरोध और विद्रोह का प्रतीक हैं। कविता में गतिशील बिंबों का सुंदर प्रयोग किया गया है, जिससे दृश्य जीवंत दिखाई देता है। ‘दैन्य दानव’, ‘क्रूर स्थिति’ और ‘कंगाल बुद्धि’ जैसे छोटे-छोटे शब्द-समूह अपने भीतर बहुत गहरे अर्थ समेटे हुए हैं।

‘अन्यथा स्वातंत्र्य इति’ में लाक्षणिक अर्थ दिखाई देता है। इसका भाव है कि भूखे और गरीब व्यक्ति के लिए केवल स्वतंत्रता का कोई विशेष महत्व नहीं है। उसके लिए स्वतंत्रता तभी सार्थक है, जब उसकी मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी हों।

कविता में तत्सम शब्दों का अधिक प्रयोग हुआ है। इसमें अतुकांत छंद होने के बावजूद भाषा में स्वाभाविक लय बनी रहती है। कहीं-कहीं तुक का सहज प्रयोग भी कविता को प्रभावशाली बनाता है।

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Chapter 6: कैसे बनती है कविता - पाठ से संवाद [Page 113]

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NCERT Hindi Abhivyakti aur Madhyam Class 11 and 12
Chapter 6 कैसे बनती है कविता
पाठ से संवाद | Q 3. | Page 113
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