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'सई साँझ' में घुसने पर बनारस की किन-किन विशेषताओं का पता चलता है? - Hindi (Elective)

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Question

'सई साँझ' में घुसने पर बनारस की किन-किन विशेषताओं का पता चलता है?

Answer in Brief
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Solution

कवि के अनुसार सई-साँझ के समय यदि कोई बनारस शहर में जाता है, तो उसे निम्नलिखित विशेषताओं का पता चलता है।-

  1. यहाँ मंदिरों में हो रही आरती के कारण सारा वातावरण आलोकित हो रहा होता है।
  2. आरती के आलोक में बनारस शहर की सुंदरता अतुलनीय हो जाती है। यह कभी आधा जल में या आधा जल के ऊपर सा जान पड़ता है।
  3. यहाँ प्राचीनता तथा आधुनिकता का सुंदर रूप दिखाई देता है। अर्थात जहाँ एक ओर यहाँ प्राचीन मान्यताएँ जीवित हैं, वहीं यह बदलाव की ओर भी अग्रसर है।
  4. गंगा के घाटो में कहीं पूजा का शोर है, तो कहीं शवों का दाहसंस्कार होता है, जो हमें जीवन के कड़वे सत्य के दर्शन कराता है।
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बनारस
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शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

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शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

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शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
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आप बनारस के बारे में क्या जानते हैं? लिखिए।


बनारस के चित्र इकट्ठे कीजिए।


बनारस शहर की विशेषताएँ जानिए।


निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए -

जो है वह खड़ा है
बिना किसी स्तंभ के
जो नहीं है उसे थामे है
राख और रौशनी के ऊँचे ऊँचे स्तंभ
आग के स्तंभ
और पानी के स्तंभ
धूएँ के
खुशबू के
आदमी के उठे हुए हाथों के स्तंभ

किसी अलक्षित सूर्य को
देता हुआ अर्घ्य
शताब्दियों से इसी तरह
गंगा के जल में
अपनी एक टांग पर खड़ा है यह शहर
अपनी दूसरी टांग से
बिल्कुल बेखबर!

(क) जो है वह खडा है बिना किसी स्तंभ के.......' वह जो बिना सहारे के खड़ी है -   (1)

  1. दार्शनिकता
  2. आध्यात्मिकता
  3. धुएं की विशालता
  4. पानी की पवित्रता

(ख) 'अपनी दूसरी टांग से बिल्कुल बेखबर' पंक्ति का आशय है कि -  (1)

  1. अध्यात्मिकता से अनभिज्ञ होना
  2. आधुनिकता से अनभिज्ञ होना
  3. सांसारिकता से अनभिज्ञ होना
  4. दार्शनिकता से अनभिज्ञ होना

(ग) राख के स्तंभ से क्या अभिप्राय है?   (1)

  1. पूजा-पाठ की सामग्री के ढेर से
  2. शवों के राख के ढेर से
  3. मिट्टी के ढेर से
  4. मुरझाए फूलों के ढेर से

(घ) आस्था, विरक्ति, विश्वास, आश्चर्य और भक्ति का मिला-जुला रूप दिखाई देता है -    (1)

  1. श्रद्धा और अंधभक्ति में
  2. मोक्ष की अवधारणा में
  3. मिथकीय आस्था में
  4. बनारस की आध्यात्मिकता में

(ङ) मनुष्य के हाथ स्तंभ की भांति खड़े हो जाते हैं -    (1)

  1. मंदिर की ध्वजा को प्रमाण करने के लिए
  2. अदृश्य को अर्घ्य देने के लिए
  3. किसी की मदद के लिए
  4. श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए

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