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सामान्य काँच की तुलना में हीरे का अपवर्तनांक काफी अधिक होता है? क्या हीरे को तराशने वालों के लिए इस तथ्य का कोई उपयोग होता है? - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

सामान्य काँच की तुलना में हीरे का अपवर्तनांक काफी अधिक होता है? क्या हीरे को तराशने वालों के लिए इस तथ्य का कोई उपयोग होता है?

Short/Brief Note
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Solution

वायु के सापेक्ष हीरे का अपवर्तनांक 2.42 (काफी अधिक) है तथा क्रान्तिक कोण 24° (बहुत कम) है। हीरा तराशने में दक्ष कारीगर इस तथ्य का उपयोग करते हुए हीरे को इस प्रकार तराशता है, कि एक बार हीरे में प्रवेश करने वाली प्रकाश किरण हीरे के विभिन्न फलकों पर बार-बार परावर्तित होने के बाद ही किसी फलक से बाहर निकल पाए। इसके लिए हीरे की आन्तरिक सतह पर आपतन कोण 24° से अधिक होना चाहिए। इससे हीरा अत्यधिक चमकीला दिखाई पड़ता है।

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गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश का परावर्तन
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Chapter 9: किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र - अभ्यास [Page 350]

APPEARS IN

NCERT Bhautiki bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12
Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
अभ्यास | Q 9.18 - (e) | Page 350

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  1. दूरबीन का समायोजन सामान्य है (अर्थात अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है)।
  2. अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी (25 cm) पर बनता है।

  1. दूरबीन का समायोजन सामान्य है (अर्थात अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है)। अभिदृश्यक लेंस तथा नेत्रिका के बीच पृथक्कन दूरी क्या है?
  2. यदि इस दूरबीन का उपयोग 3 km दूर स्थित 100 m ऊँची मीनार को देखने के लिए किया जाता है तो अभिदृश्यक द्वारा बने मीनार के प्रतिबिंब की ऊँचाई क्या है?
  3. यदि अंतिम प्रतिबिंब 25 cm दूर बनता है तो अंतिम प्रतिबिंब में मीनार की ऊँचाई क्या है?

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