Advertisements
Advertisements
Question
साक्षात्कार में से चुनकर एक वाक्य नीचे दिया गया है। इसे ध्यान से पढ़िए और इस पर विचार कीजिए। आपको इसका क्या अर्थ समझ में आया? अपना विचार लिखिए।
“तुम नौकरी में बँट जाओगे। तुम्हारे अंदर का नर्तक पूरी तरह पनप नहीं पाएगा।”
Advertisements
Solution
यह पंक्ति बिरजू महाराज के चाचा ने उनसे कही थी, जब वे नौकरी करने लगे थे। इसका अर्थ है कि नौकरी के बँधे हुए समय, दफ्तर के काम और जिम्मेदारियों में कलाकार इतना व्यस्त हो जाता है कि उसके पास अपनी कला के लिए पूरा समय, एकाग्रता और ऊर्जा नहीं बच पाती। फलस्वरूप उसके भीतर सोई हुई प्रतिभा पूरी तरह विकसित (पनप) नहीं पाती। चाचा जी यह समझाना चाहते थे कि किसी भी कला में ऊँचाई छूने के लिए तन-मन की पूरी लगन और निरंतर अभ्यास चाहिए, जो नौकरी के साथ कठिन है। परंतु बिरजू महाराज ने अपने दृढ़ निश्चय और कठोर अभ्यास से यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची लगन हो तो नौकरी करते हुए भी कला में सर्वोच्च स्थान पाया जा सकता है।
