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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

सागर का जो था मंसूबा सफल हो गया, खुशियों की दुनिया में आकर स्वयं खो गया। धरती ने शुंगार किया, फिर माथे रोली, सोंधी सोंधी-सी सुगंध, माटी से बोली।। पावस का मधुमास आस- - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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Question

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सागर का जो था मंसूबा सफल हो गया,
खुशियों की दुनिया में आकर स्वयं खो गया।
धरती ने श्रृंगार किया, फिर माथे रोली,
सोंधी सोंधी-सी सुगंध, माटी से बोली।।

पावस का मधुमास आस-विश्वास बढ़ाता,
नत मस्तक होकर ‘अचूक’ पद पुष्प चढ़ाता।
सदा-सदा से चलती आई हँसी-ठिठोली,
सोंधी सोंधी-सी सुगंध, माटी से बोली।।

(1) एक/दो शब्दों में उत्तर लिखिए:  (2)

  1. इसका मंसूबा सफल हो गया - .................
  2. इसने श्रृंगार किया - .................
  3. सोंधी-सी सुगंध इससे बोली - .................
  4. पावस का मधुमास यह बढ़ाता है - .................

(2) अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।   (2)

Comprehension
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Solution

(1)

  1. इसका मंसूबा सफल हो गया - सागर का
  2. इसने शुंगार किया - धरती ने
  3. सोंधी-सी सुगंध इससे बोली - माटी से
  4. पावस का मधुमास यह बढ़ाता है - आस-विश्वास

(2) कवि कहते हैं कि, वर्षा ऋतु का वसंत काल समस्त प्राणियों में आशा और विश्वास की भावना की वृद्धि करता है। ऐसा लगता है, जैसे वर्षा ऋतु श्रद्धा से सिर झुकाकर पृथ्वी माता के चरणों में वर्षा का जल रूपी पुष्प अर्पित कर रही हो। यह प्रथा युगों-युगों से इसी तरह हँसी-खुशी चलती आई है। वर्षा ऋतु में सोंधी-सोंधी-सी सुगंध मिट्टी से यह बात कहती है।

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