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रेडियो नाटक लेखन का प्रारूप बनाइए और अपनी पुस्तक की किसी कहानी के एक अंश को रेडियो नाटक में रूपांतरित कीजिए।

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Question

रेडियो नाटक लेखन का प्रारूप बनाइए और अपनी पुस्तक की किसी कहानी के एक अंश को रेडियो नाटक में रूपांतरित कीजिए।

Writing Skills
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Solution

रेडियो नाटक में दृश्य दिखाई नहीं देता, इसलिए उसे संवादों, ध्वनि-प्रभावों, संगीत और आवाज़ों के माध्यम से श्रोताओं तक पहुँचाया जाता है।

प्रारूप:

  1. शीर्षक: नाटक का नाम।
  2. पात्र परिचय: नाटक में आने वाले पात्रों के नाम।
  3. उद्घोषक/सूत्रधार: आवश्यक होने पर स्थान, समय और परिस्थिति की जानकारी देता है।
  4. दृश्य संकेत: समय और वातावरण बताने के लिए ध्वनि-संकेत दिए जाते हैं।
  5. ध्वनि प्रभाव: जैसे दरवाज़ा खुलना, कदमों की आवाज़, बारिश, गोली चलना, ट्रेन आदि।
  6. संवाद: पात्रों के छोटे, स्वाभाविक और स्पष्ट संवाद।
  7. पार्श्व संगीत: भाव और वातावरण को प्रभावशाली बनाने के लिए उपयुक्त संगीत।
  8. समापन: संवाद, संगीत या ध्वनि के साथ नाटक का अंत।

शीर्षक: उसने कहा था

आधार: चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ की कहा

पात्र: सूत्रधार, लहना सिंह, सूबेदारनी

दृश्य – बचपन की स्मृति

(बाज़ार की चहल-पहल और लोगों के आने-जाने की आवाज़)
सूत्रधार एक बार लहना सिंह की मुलाकात बचपन की एक परिचित लड़की से होती है। दोनों के बीच पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं।
लड़की तुम्हें याद है, तुमने मुझे तब क्या कहा था?
लहना सिंह हाँ, मुझे सब याद है। बचपन की बातें भला कैसे भूल सकता हूँ?
लड़की अगर मैं तुम्हें कोई बात कहूँ, तो क्या तुम उसे याद रखोगे?
लहना सिंह क्यों नहीं! तुम कहो तो सही।
(कुछ क्षण का मौन)
लड़की मेरी एक बात हमेशा याद रखना।
लहना सिंह मैं तुम्हारी बात कभी नहीं भूलूँगा
(हल्का भावुक संगीत)

सूत्रधार रेडियो नाटक का वह व्यक्ति होता है जो कहानी को आगे बढ़ाता है और श्रोताओं को बताता है कि क्या हो रहा है। उसे तुम Narrator (कहानी सुनाने वाला) भी समझ सकते हो।

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Chapter 12: कैसे बनता है रेडियो नाटक - पाठ से संवाद [Page 154]

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NCERT Hindi Abhivyakti aur Madhyam Class 11 and 12
Chapter 12 कैसे बनता है रेडियो नाटक
पाठ से संवाद | Q 3. | Page 154
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